नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत महापुरुषों की विरासत को संभाल कर रखने के लिए विश्व विख्यात है। उन्हीं महापुरुषों में से एक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam Birthday) की आज जयंती है। डॉ कलाम ने साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान दिया है जिसके चलते उन्हें मिसाइल मैन की उपाधि से नवाजा गया है। इस दिन को 15 अक्टूबर 2010 को संयुक्त राष्ट्र ने वर्ल्ड स्टूडेंट्स डे के रूप में मनाने की घोषणा की थी। कलाम साहब स्टूडेंट्स को देश का भविष्य मानते थे। उनका मानना था कि जो स्टूडेंट बड़ा लक्ष्य रखते हैं वही बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।
“छोटा लक्ष्य अपराध है, बड़ा लक्ष्य साधें”
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने जीवन में शिक्षा को सबसे ज्यादा अहमियत दी और अपने प्रयासों से विद्यार्थियों को हमेशा न सिर्फ शिक्षा बल्कि क्वालिटी एजुकेशन लेने पर बल दिया। कलाम साहब का कहना था कि जीवन में अगर सफलता को पाना है तो हमेशा अपना लक्ष्य बड़ा रखो, छोटा लक्ष्य अपराध है। कलाम साहब के इन्ही प्रेरणादायक विचारों के कारण उनकी जयंती पर देशभर के शिक्षा संस्थानों में उनके भाषण, सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का मकसद डॉ. अब्दुल कलाम के साइंटिफिक विचारों को आगे बढ़ाना है।
इस महान उपलब्धि के लिए मिली ‘मिसाइल मैन’ की उपाधि
भारत ने देश में बना हुआ पहला उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV-3 का निर्माण किया। इस यान के द्वारा ही भारत ने रोहिणी उपग्रह को अतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजा था। इस मिसाइल के निर्माण में डॉ. कलाम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके अलावा भी कलाम साहब ने देश को स्वाबलंबी बनाने की दिशा में कई अहम मिसाइल बनाई जिसमें पोखरण-2 में इस्तेमाल हुई मिसाइल बनाने में भी अमूल्य योगदान दिया था। इसके चलते उन्हें ‘मिसाइल मैन’ की उपाधि दे दी गई थी।





