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Tuesday, March 3, 2026
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पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को कितनी मिलती थी पेंशन, अब किसे मिलेगी? जानिए पूरी जानकारी

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन का सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन का सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। उनके बेटे और झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके निधन की पुष्टि की।

तीन बार बने थे मुख्यमंत्री, लेकिन कभी नहीं पूरा किया कार्यकाल

शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे। पहली बार 2005 में महज 10 दिनों के लिए। दूसरी बार 2008 में करीब 1 साल तक और तीसरी बार 2009 में कुछ महीनों तक हालांकि, वे कभी भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इसके बावजूद, उन्हें एक पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर सरकारी पेंशन और सुविधाएं मिलती थीं।

पूर्व मुख्यमंत्री को कितनी मिलती है पेंशन और क्या-क्या सुविधाएं?

राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके कार्यकाल की अवधि और सार्वजनिक सेवा के आधार पर पेंशन दी जाती है। यदि पूर्व मुख्यमंत्री विधायक भी रहे हैं, तो उन्हें एक्स-एमएलए के रूप में लगभग 15,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। इसके अलावा उन्हें आवास, टेलीफोन, इंटरनेट, यात्रा भत्ता और चिकित्सा सुविधा जैसी अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं। मुख्यमंत्री पद के कारण मिलने वाली पेंशन अलग होती है, जिसका आंकड़ा 30,000 रुपये से 50,000 रुपये प्रतिमाह तक हो सकता है राज्य के नियमों पर निर्भर करता है।

अब यह पेंशन परिवार में किसे मिलेगी?

सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी पेंशनर की मृत्यु के बाद उसकी पेंशन आमतौर पर उसके जीवनसाथी पत्नी या पति को मिलती है। पत्नी को मिलेगा पेंशन का 50% हिस्सा। यदि दो बच्चे हैं और वे 25 साल से छोटे हैं, तो उन्हें पेंशन का 25-25% हिस्सा मिलता है। पत्नी को यह पेंशन जीवनभर मिलती है, जब तक वह दोबारा विवाह नहीं करती। यदि पत्नी दोबारा विवाह करती हैं, तो पेंशन बंद कर दी जाती है और बच्चों का हिस्सा बढ़ा दिया जाता है। कर्मचारी या नेता अपने जीवनकाल में किसी व्यक्ति को नॉमिनी भी बना सकता है, जो उसकी मृत्यु के बाद पेंशन पाने का अधिकारी होता है। शिबू सोरेन एक अनुभवी और संघर्षशील नेता थे। उनके निधन के बाद अब उनकी पेंशन उनकी पत्नी रूपी सोरेन को मिलने की संभावना है। अगर उनके बच्चे पात्र हैं 25 वर्ष से कम आयु के हैं, तो उन्हें भी इसका हिस्सा मिल सकता है। सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार यह पेंशन अब उनके परिवार के सदस्यों को दी जाएगी।

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