नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लोकगायिका शारदा सिन्हा का निधन हो गया है। उन्होंने दिल्ली के AIIMS अस्पताल में 5 नवंबर को आखिरी सांस ली। वह 72 साल की थीं, बिहार कोकिला के नाम से मशहूर शारदा सिन्हा को 26 अक्टूबर को तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 4 नवंबर को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमान सिंह ने उनके निधन की जानकारी फेसबुक पर दी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘आप सब की प्रार्थना और प्यार हमेशा मां के साथ रहेंगे। मां को छठी मईया ने अपने पास बुला लिया है। मां अब शारीरिक रूप में हम सब के बीच नहीं रहीं।’
अस्पताल से रिलीज़ करवाया अपना आखिरी गाना
शारदा सिन्हा ने अपने बेटे अंशुमान सिन्हा से कहकर अस्पताल से ही अपना आखिरी गाना रिलीज़ करवाया था। छठ पर्व पर उनका आखिरी गाना एक दिन पहले ही रिलीज़ किया गया था। अंशुमान सिन्हा ने बताया था कि उनकी मां ने कहा था, ‘मैं रहूं या न रहूं, ये गाना मेरा आखिरी उपहार होगा।’
छठ गीतों से घर-घर में हुईं लोकप्रिय
शारदा सिन्हा को भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मभूषण से सम्मानित किया था। शारदा सिन्हा बिहार कोकिला के नाम से भी जानी जाती थीं और उनके छठ गीत बिहार के छठ पर्व के दौरान सबसे ज्यादा सुने जाते हैं। छठ गीतों से शारदा सिन्हा ने घर-घर में पहचान बनाई थी। उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए भी गाने गाए हैं। इनमें ‘मैंने प्यार किया’ का ‘काहे तोसे सजना…’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का ‘तार बिजली…’ और ‘हम आपके हैं कौन’ का ‘बाबुल’ गाना प्रमुख हैं।
शारदा सिन्हा के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘स्वर्गीय शारदा सिन्हा जी के छठ महापर्व पर सुरीली आवाज में गाए मधुर गाने बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के सभी भागों में गूंजा करते हैं। उनके निधन से संगीत के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों एवं प्रशंसकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना है।’
शारदा सिन्हा की आवाज़ छठ पर्व का पर्यायवाची बन चुकी थी। ऐसे में छठ पर्व के पहले दिन उनके निधन की खबर उन्हें जानने वालों और उनके गाने पसंद करने वालों के लिए एक बड़ा झटका है।




