नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अपने एक साल के लंबे आंदोलन की बदौलत नरेंद्र मोदी सरकार से कृषि कानूनों को निरस्त करवाने में कामयाब रहे किसानों ने एक बार फिर नए सिरे से विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर ली हैं। किसानों ने आज सोमवार को दिल्ली की ओर शुरु किया लेकिन वह दिल्ली पहुंच नहीं सके। हालांकि अब इस पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। किसानों का कहना है कि हम पहले यूपी सरकार से बातचीत करेंगे। बातचीत असफल होने के बाद एक बार फिर दिल्ली कूच का ऐलान किया जाएगा।
रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों की नोएडा अथॉरिटी, पुलिस और जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक यमुना प्राधिकरण के सभागार में करीब 3 घंटे तक चली। हालांकि, वार्ता विफल रही। जिसके बाद भारतीय किसान परिषद (BKP) नेता सुखबीर खलीफा ने घोषणा की कि संसद परिसर तक मार्च निकालकर नए कृषि कानूनों के तहत मुआवजे और लाभ की मांग को लेकर सोमवार को विरोध प्रदर्शन करेंगे।
ये हैं किसानों की मांग
किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। किसानों का कहना है कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहित भूमि का 4 गुना मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि गौतमबुद्ध नगर में 10 साल से सर्किल रेट भी नहीं बढ़ाया गया। नए भूमि अधिग्रहण कानून के लाभ जिले में लागू करें। किसान चाहते हैं कि जमीन अधिग्रहण के बदले 10 फीसदी विकसित भूखंड दिया जाए और 64.7 फीसदी की दर से मुआवजा दिया जाए। भूमिधर, भूमिहीन किसानों के बच्चों को रोजगार और पुनर्विकास के लाभ दें। उच्चाधिकार समिति की सिफारिशें लागू की जाएं। आबादी क्षेत्र का उचित निस्तारण हो।
किसानों के मार्च को लेकर नोएडा और दिल्ली पुलिस सतर्क हो गई है और बॉर्डर पर सतर्कता बरती जा रही है। कई जगहों पर बेरिकेड्स लगा दिए गए हैं। कई किसान नेताओं को नजरबंद भी किया जा रहा है। नोएडा से सटे सभी बॉर्डर पर बैरिकेटिंग की गई है। नोएडा और दिल्ली पुलिस ने समन्वय स्थापित किया है। वहीं, मेट्रो के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।




