नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने रविवार को कहा कि बाबरी मस्जिद- राम जन्मभूमि के विवाद के समय वो समाधान के लिए भगवान के आगे बैठ गए थे। उन्होंने कहा, “कई बार ऐसा होता है जब हमारे पास कोई हल नहीं होता है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ जब यह मामला तीन महीनों से मेरे सामने था।”
पैतृक गांव में आयोध्या मंदिर को लेकर लोगों से कर रहे थे बात
अपने पैतृक गांव कानहेरसर गांव के लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस ने कहा, ‘मैं भगवान के आगे बैठ गया था और उनसे प्रार्थना की कि वो समाधान निकालें। मेरा विश्वास करिए जब आपको विश्वास होता है तो भगवान हमेशा रास्ता दिखाते हैं।’
राम मंदिर के ऐतिहासिक फैसले के समय चंद्रचूड़ पांच जजों की बेंच में शामिल थे
9 नवंबर, 2019 को, भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-जजों की बेंच ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर यह फैसला सुनाया था कि यहां पर राम मंदिर बनेगा और भगवान राम का मूर्ति की स्थापना की जाएगी। साथ ही मुस्लिम पक्ष को आयोध्या में ही किसी और स्थान पर जमीन दी जाएगी।
“ईश्वर में विश्वास है तो मिलेगा रास्ता”
उन्होंने कहा, ‘ न्यायपालिका का काम समाधान ढूंढना है, लेकिन कई बार आस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद इसका जीवंत उदाहरण है, जहां संवेदनशीलता के बावजूद एक निष्पक्ष और न्यायसंगत फैसला सुनाया गया।’ उन्होंने कहा, “यदि आप ईश्वर में विश्वास रखते हैं, तो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी एक रास्ता मिल जाएगा।”
PM मोदी की उपस्थिति में 22 जनवरी को राम मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई
22 जनवरी को चंद्रचूड़ इस साल जुलाई में राम मंदिर गए थे और वहां जाकर पूजा की थी। इसी साल 22 जनवरी को मंदिर में मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां पर मौजूद थे।




