नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में होने वाले निकाय चुनाव से ठीक पहले कोंकण क्षेत्र की राजनीति अचानक गरमा उठी है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक निलेश राणे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पार्टी के कार्यकर्ता आधी रात को गुपचुप तरीके से नकदी बांटकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस कथित घटना के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। वहीं, पुलिस द्वारा संदिग्ध गाड़ी से बरामद नकदी की जांच भी जारी है।
आधी रात को नकदी के साथ पकड़ी गई संदिग्ध गाड़ी
विधायक निलेश राणे ने दावा किया कि मालवण में चुनाव से एक दिन पहले देर रात दो संदिग्ध गाड़ियों की गतिविधियों की जानकारी उन्हें मिली थी।पहली संदिग्ध गाड़ी का नंबर MH 07 AS 6960 था, जो कथित तौर पर देवगड के एक बीजेपी कार्यकर्ता की बताई जा रही है।राणे के अनुसार, इस गाड़ी में बीजेपी के देवगड तालुकाध्यक्ष महेश विश्राम नारकर और कृष्णकांत आडिवरेकर मौजूद थे।निलेश राणे ने दावा किया कि दोनों को बड़ी मात्रा में नकदी के साथ पकड़ा गया।
किसके लिए जा रही थी यह रकम? राणे का सीधा सवाल
निलेश राणे ने मौके पर पहुंचकर सीधे पुलिस के सामने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, गाड़ी में भरी यह नकदी किसके लिए जा रही थी और कहां बांटी जानी थी, यह एक बड़ा सवाल है। राणे ने सवाल किया कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद इतनी बड़ी रकम किस उद्देश्य से रात के समय चुनाव क्षेत्र में घूम रही थी।
‘लोकतंत्र से खिलवाड़ कर रही बीजेपी’
शिवसेना विधायक ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।राणे ने इसे ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़’ करार दिया।उन्होंने कहा कि बीजेपी को अपनी जमीन खिसकती दिख रही है, इसलिए ऐसे हथकंडों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बीजेपी की हार का डर दिखाता है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
निलेश राणे ने पुलिस प्रशासन से इस पूरे मामले की पारदर्शी तरीके से जांच करने की मांग की है।उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी पार्टी या पद से जुड़े हों।राणे के अनुसार, लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों पर तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।मालवण में चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच के नतीजों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।




