नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 75 साल के हो चुके हैं। इस खास मौके पर देश-विदेश से बधाइयों की बौछार हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन की खुशी का जश्न मनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर जैसी वैश्विक हस्तियों ने उन्हें दिल से बधाई और शुभकामनाएँ भेजीं।
प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस वजह से अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है। क्या पीएम पद संभालते हुए उन्हें पूर्व सीएम के तौर पर पेंशन मिलती है?
पहले जानिए RSS कार्यकर्ता से PM तक का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा 1958 में आरएसएस से शुरू हुई। गुजरात के प्रमुख लक्ष्मण राव इनामदार के मार्गदर्शन में युवा स्वयंसेवक बने, और भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला के साथ कदम से कदम मिलाकर अपने नेतृत्व का सफर तय किया।
गुजरात के चार बार CM बने
साल 2001 में गुजरात में आए भयानक भूकंप ने पूरे प्रदेश को तहस-नहस कर दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल के इस्तीफा देने के बाद नरेंद्र मोदी को जिम्मेदारी संभालने दिल्ली से भेजा गया। उनकी प्रभावशाली लीडरशिप ने गुजरात को बदला और वे 2001-2014 तक लगातार चार बार मुख्यमंत्री बने।
साल 2014 में PM के रुप में ली शपथ
साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने पांचवीं बार शपथ ली, लेकिन इस बार वे देश के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद सवाल उठता है। पीएम पद संभालने के बावजूद क्या उन्हें पूर्व सीएम के तौर पर पेंशन मिलती है? आइए, इस रहस्य की सच्चाई जानते हैं।
क्या पूर्व सीएम के रुप में पीएम मोदी को मिलती है पेंशन ?
लोग अक्सर जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर पेंशन मिलती है। इसका साफ उत्तर है- नहीं। भारतीय कानून के अनुसार, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के लिए पेंशन का प्रावधान नहीं है। पद छोड़ने के बाद उन्हें केवल सांसद या विधायक के रूप में पेंशन मिलती है।
हालांकि, गुजरात देश का अकेला राज्य है जहां पूर्व विधायकों के लिए पेंशन का कोई प्रावधान नहीं है। 2001 में विधानसभा ने पेंशन अधिनियम रद्द कर दिया था, जिसके बाद यह सुविधा बंद हो गई। लंबे समय से इसकी बहाली की मांग जारी है। फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ पीएम पद की सैलरी और सुविधाएँ ही ले रहे हैं।





