नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मध्य प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि विधायकों को अपना इनकम टैक्स खुद से भरना होगा। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव के इस फैसले के बाद से अब सांसदों को मिलने वाली सुविधा में आयकर लगाने की चर्चा जोरो पर चलने लगी है। साथ ही लोगों के मन में एक सवाल चल रहा है कि क्या सांसदों और विधायकों को आयकर देना होता है? आइए जानते हैं इस विषय के बारे में।
सांसदों को केवल अपने वेतन पर ही टैक्स देना होता है
जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि सांसदों को भी अपनी आय पर इनकम टैक्स देना होता है। सांसदों को केवल अपने वेतन पर ही टैक्स देना होता है। जबकि सांसदों को मिलने वाले भत्तों में इनकम टैक्स नहीं लगता है। सांसदों के डेली अलाउंस, सीट के लिए मिलने वाले अलाउंस और ऑफिस भत्तों को आयकर से अलग रखा हुआ है। सांसदों को कुछ भत्तों पर टैक्स देना होता है, जो सामान्य भत्तों से अलग होते हैं। सांसदों को 1 लाख रूपये वेतन मिलता है, जिस पर उन्हें आयकर देना होता है। सामान्य भत्तों को छोड़कर कुछ अन्य भत्तों पर भी सांसदों को टैक्स देना होता है।
विधायकों के आयकर के लिए हर राज्य में अलग अलग नियम हो सकते हैं
विधायकों के आयकर के लिए हर राज्य में अलग अलग नियम हो सकते हैं, जो कि राज्य सरकार के द्वारा तय किए होते हैं। कई राज्यों में विधायकों को अपनी सैलरी पर आयकर देना होता है। साथ में ही उन्हें कुछ भत्तों पर भी टैक्स देना होता है। लेकिन कुछ राज्यों में विधायकों के वेतन में लगने वाले आयकर को राज्य सरकार ही जमा करती है। मध्य प्रदेश भी इस सूची में शामिल था, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के इस नियम को बदल दिया और अब मध्य प्रदेश में विधायकों को अपना आयकर खुद ही जमा करना होगा। भारत में हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां की सरकार अपने विधायकों का टैक्स जमा करती है।
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को अपने वेतन पर ही टैक्स देना होता है
बता दें कि प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को अपने वेतन पर ही टैक्स देना होता है। भारत में केवल सिक्किम ऐसा राज्य है, जहां लोगों को अपनी आय पर आयकर नहीं देना होता है। सिक्किम इनकम टैक्स मैनुअल 1948 के तहत इस राज्य के लोगों को अपनी आय पर आयकर नहीं देना होता है।
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