नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कथित सत्ता हस्तांतरण के समझौते को लेकर राजनीतिक हलकों में ‘नवंबर क्रांति’ की चर्चाएं ज़ोरों पर हैं। इन चर्चाओं के बीच, पूर्व सांसद और डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश का बयान उनके समर्थकों की निराशा को दर्शाता है।
सीएम पद पर ‘भाग्य’ का सहारा’
डीके सुरेश से जब उनके बड़े भाई डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हताश होते हुए भाग्यवादी रुख अपनाया। सुरेश ने कहा, यदि मेरे भाई के भाग्य में होगा तो वह मुख्यमंत्री बनेंगे वरना क्या ही कर लेंगे। सब स्वीकार करना होगा।उन्होंने साफ किया कि हाईकमान (कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व) का जो फैसला होगा, वही अंतिम होगा और उसे स्वीकार किया जाएगा।उन्होंने आगे कहा, यदि भाग्य होगा तो बदलाव होगा। यदि भाग्य में उपलब्धि नहीं होगी तो पद नहीं मिलेगा। इसके बारे में चिंता करने की जरूरत ही क्या है।
‘नवंबर क्रांति’ पर चुप्पी
संभावित नेतृत्व परिवर्तन के लिए नवंबर के महीने का ज़िक्र होने पर डीके सुरेश ने इसे टाल दिया, उन्होंने कहा कि उन्हें लीडरशिप चेंज के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनके लिए तो नवंबर का महीना कन्नड़ राज्योत्सव का है, जिसे सभी कन्नड़ भाषी मनाते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी जानकारी के लिए मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष (डीके शिवकुमार) और राष्ट्रीय नेताओं से पूछना चाहिए।
डीके शिवकुमार की मौजूदा स्थिति
डीके सुरेश ने कहा कि वर्तमान में डीके शिवकुमार का मुख्य ध्यान पार्टी की भलाई पर है। शिवकुमार फिलहाल डिप्टी सीएम हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनका यह काम है कि पार्टी को कोई नुकसान ना हो। इसलिए मैं समझता हूं कि वह ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो। नवंबर क्रांति से बेपरवाह होने के सवाल पर सुरेश ने कहा कि शिवकुमार पार्टी अध्यक्ष होने के नाते पार्टी के हितों और सम्मान की रक्षा करते हुए अपना आचरण कर रहे हैं और वह पार्टी के फैसलों का पालन करेंगे।
ढाई साल के रोटेशन की अटकलें
पृष्ठभूमि: मई 2023 में सीएम पद की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद, डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करने के लिए मना लिया गया था। उस समय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ढाई साल बाद रोटेशनल मुख्यमंत्री की व्यवस्था पर सहमति बनी थी, लेकिन पार्टी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की।
डीके सुरेश ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस को पांच साल का जनादेश मिला है और सरकार वादों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। कर्नाटक की राजनीति में ये बयान तब आए हैं जब सिद्धारमैया के बेटे ने भी अपने पिता के राजनीतिक करियर को आखिरी पड़ाव बताते हुए सतीश जरकिहोली को सीएम बनाने की सिफारिश की थी।




