नयी दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। लोकसभा में सोमवार को विशेष रूप से सक्षम बच्चों को शिक्षा देनेवाले स्कूलों को विशेष मान्यता देने के बारे में चर्चा हुई। भुवनेश्वर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्य अपराजिता सारंगी ने इस मुद्दे को उठाते हुये कहा कि क्या शिक्षा मंत्रालय भारतीय पुनर्वास परिषद के साथ मिलकर विशेष रूप से समक्ष बच्चों को शिक्षा दिलाने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित करने की किसी रणनीति पर विचार कर रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने इसक जवाब में कहा कि उन्हें इसके लिये पूरे सदन के सहयोग की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से सक्षम बच्चों की आबादी करीब दस प्रतिशत होगी और इसी कारण इतनी बड़ी संख्या एक चुनौती है। इसके लिये सभी को मिलकर काम करना होगा। कांग्रेस के सांसद तरुण गोगोई ने सलाह दी कि सरकर को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नीतियों को बनाने के लिये इन बच्चों के प्रतिनिधित्व पर विचार करना चाहिये। इस तरह से इन बच्चों की समस्याओं को ठीक से समझा जा सकेगा और उसकी के मुताबिक इनका हल निकलना भी आसान होगा। शिक्षा मंत्री ने इस पर कहा कि यह एक साथक चर्चा है और उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस सांसद की सलाह पर जरूर गौर किया जायेगा। केरल से सांसद ई टी मोहम्मद बशीर ने पूछा कि क्या शिक्षा मंत्रालय ने देश में सांकेतिक भाषा को विकसित करने का कोई विशेष प्रयास किया है और क्या सांकेतिक भाष का इस्तेमाल करने वाले छात्रों के लिये शिक्षा प्रौद्योगिकी विकसित की गयी है तो केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दोलों परामर्श अच्छे हैं और सरकार इन पर विचार कर रही है। –आईएएनएस एकेएस/आरजेएस




