नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । उपराष्ट्रपति जयदीप धनखड़ के पद से इस्तीफे के बाद से देश की सियासत गरमाई हुई है। उनके अचानक इस्तीफे के बाद विपक्षी नेता लगातार सवाल उठे रहे है। जयदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य कारण बताया है। इस बीच, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने मंगलवार को जयदीप धनखड़ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होने कहा कि, धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि उन्होंने अपनी सीमा लांघ दी थी। और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने पर सरकार का विरोध किया था। “चिदंबरम ने दावा किया कि इससे सरकार के साथ उनके रिश्तो में खटास आ गई। यह साफ तौर से नजर आ रहा है कि दोनों अब एकमत नहीं हैं। चिदंबरम ने कहा, “जब सरकार ने धनखड़ पर भरोसा खो दिया, तो उन्हें जाना ही पड़ा।
‘धनखड़ का समर्थन खत्म’
चिदंबरम ने राज्यसभा में धनखड़ के इस्तीफे के संक्षिप्त और अचानक ऐलान को इस बात का सबूत बताया कि दोनों पक्षों के बीच अब कोई आपसी सम्मान नहीं बचा है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि कोई विदाई समारोह नहीं हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि धनखड़ का समर्थन खत्म हो गया है।
विश्वास और संबंध पूरी तरह से टूट चुका
चिदंबरम ने आगे कहा, “उपसभापति ने राज्यसभा में उपराष्ट्रपति पद के खाली स्थान के बारे में एक संक्षिप्त और ऑफिशियल ऐलान किया और कहा कि कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। इससे साफ हो गया है कि, सरकार ने बिना किसी शोर-शराबे या धूमधाम के जगदीप धनखड़ को अलविदा कह दिया है, जिसका मतलब है कि दोनों तरफ का विश्वास और संबंध पूरी तरह से टूट चुका है।”
और साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ने देश में मौजूदा समय में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते तनाव पर भी बात की और कहा कि धनखड़ ने एक साल से ज़्यादा वक्त से न्यायिक मुद्दों पर टकराव का रुख अपनाया हुआ था।
‘मोदी सरकार तभी तक समर्थन करती है…’
चिदंबरम ने आगे कहा कि मोदी सरकार व्यक्तियों का तभी तक समर्थन करती है, जब तक वे उसके रुख से जुड़े रहते हैं, लेकिन जैसे ही वे रुख से हटते हैं, वह समर्थन वापस ले लेती है।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, “हम मोदी सरकार का कैरेक्टर अच्छे से जानते हैं। जब तक कोई शख्स उनकी बात मानता है, वे उससे दोस्ती बनाए रखते हैं। लेकिन जैसे ही वह उनकी बात से हटता है, वे अपना समर्थन वापस ले लेता है। मैं यह नहीं कह रहा कि जगदीप धनखड़ के मामले में बिल्कुल ऐसा ही हुआ है, लेकिन कुछ तो हुआ होगा।”
बैठक में नड्डा और किरण रिजिजू नहीं पहुंचे
इसके अलावा, चिदंबरम ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की एक बैठक का भी हवाला दिया, जिसमें बीजेपी नेता जेपी नड्डा और किरण रिजिजू दोपहर 12:30 बजे बैठक में शामिल हुए थे, लेकिन दोबारा बुलाई गई बैठक में नहीं पहुंचे। जिसे अन्य लोगों ने बहिष्कार के रूप में देखा।
हमने महीनों पहले ही खो दिया था भरोसा
चिदंबरम ने कहा कि धनखड़ इस घटनाक्रम से नाराज़ दिखे और उन्होंने बैठक खत्म कर दी। उन्होंने सवाल किया, “12:30 से 4:30 बजे के बीच क्या हुआ?” जब उनसे यह पूछा गया कि, क्या विपक्ष पूर्व उपराष्ट्रपति पर अपना रुख बदल रहा है, चिदंबरम ने किसी भी बदलाव से इनकार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महीनों पहले ही जगदीप धनखड़ पर भरोसा खो दिया था।




