नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय से जुड़े कानूनों में बदलाव किया है। CAA, तीन तलाक, UCC के बाद अब वक्फ बिल लोकसभा में पेश कर दिया है। इस बिल का पूरा विपक्ष ओर मुस्लिम संगठन भारी विरोध कर रहे हैं। इन फैसलों की वजह से नरेंद्र मोदी सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप भी लगते रहे हैं। चलिए जानते हैं मुस्लिमों से जुड़े उन कानूनों के बारे में जिनमें मोदी सरकार ने बदलाव किए हैं।
तीन तलाक उन्मूलन कानून
मोदी सरकार ने 28 दिसंबर, 2017 को लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 पेश किया था। इस बिल के माध्यम से सरकार का उद्देश्य तीन तलाक को अवैध घोषित करना था। यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें उनके पतियों द्वारा मन मर्जी से तलाक दिए जाने से बचाने के लिए था। लेकिन मुस्लिम संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध किया और इसे “मुस्लिम परिवारों को तोड़ने वाला” वाला कानून बताया था। इस कानून के तहत इंस्टैंट ट्रिपल तलाक यानी एक बार में तीन तलाक बोलकर तलाक देने को गैरकानूनी बताया गया है। इस कानून के तहत तीन साल तक की सज़ा का प्रावधान है।
नागरिकता संशोधन कानून 2019
केंद्र की मोदी सरकार ने तीन तलाक के बाद दिसंबर 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 लाया गया। CAA को 9 दिसंबर 2019 को पेश कर 11 दिसंबर 2019 को पास किया गया। इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देना था। इस कानून के दायरे से मुस्लिमों को बाहर रखा गया। मुसलमानों ने इसी के वजह से इसका भारी विरोध किया था। मुस्लिम संगठनों ने इस कानून को विभाजनकारी और भेदभाव वाला बताया। यूपी में इस कानून के विरोध में हिंसा भी भड़की। पुलिस को इस हिंसा में फायरिंग भी करनी पड़ी।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)
भारतीय जनता पार्टी हमेशा से कहती आई है कि हम यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) कानून को लागू करेंगे। पार्टी ने बकायदा इस मुद्दें को अपने एजेंडे में भी शामिल किया है। UCC बीजेपी सरकार का अपना अहम एजेंडा रहा है। बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में भी इसका जिक्र करती आई है। वहीं, केंद्रीय स्तर पर UCC अभी तक कानून नहीं बन सका है, लेकिन मोदी सरकार ने इसे लागू करने के मकसद से अपना इरादा स्पष्ट कर दिया है। बीजेपी शासित उत्तराखंड में UCC को कर दिया गया है। जबकि गुजरात इस कानून को लागू करने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने कानून का आकलन और समीक्षा करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025
सीएए, यूसीसी, तीन तलाक इन तीन कामों के बाद नरेंद्र मोदी सरकार वक्फ बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2025 के साथ आगे बढ़ गई है। इस बिल को केंद्र ने पहली बार अगस्त 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक के पीछे केंद्र ने तर्क दिया कि, यह बिल वक्फ बोर्ड के प्रबंधन और संपत्तियों में सुधार के लिए है, इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने, संपत्ति सर्वेक्षण और पारदर्शिता जैसे प्रावधान हैं। लेकिन इस मामले में भी में मुस्लिम समुदाय और संगठन नाराज हो गया AIMPLB और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे संगठनों ने इसे वक्फ की स्वायत्तता पर हमला बताया और कहा कि सरकार की मंशा के अनुसार गैर-मुस्लिमों को बोर्ड में शामिल करना कोई धार्मिक मामलों में दखल है। इससे केंद्र अपना पावर को इस्तेमाल कर मुसलमानों के धार्मिक संस्थाओं पर कब्जा जमाना चाहता है।





