नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दिल्ली की नई सरकार के गठन के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में CAG रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा पेश किया। यह रिपोर्ट राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी है और इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य विभाग में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिससे आम जनता को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा।
CAG रिपोर्ट के बड़े खुलासे
CAG रिपोर्ट के अनुसार, बीते 11 सालों में सिर्फ तीन अस्पताल बने या उन्हें विस्तार दिया गया। इसके बावजूद, इनका निर्माण कई सालों तक लटका रहा, जिससे लागत में जबरदस्त वृद्धि हुई। इंदिरा गांधी अस्पताल के निर्माण में पांच साल की देरी हुई और इस दौरान फंड 314 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। बुराड़ी में बन रहे अस्पताल का काम भी निर्धारित समय पर पूरा नहीं हुआ। इस देरी के कारण सरकार को 382 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। CAG रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान 787 करोड़ रुपए जारी किए थे, लेकिन खर्च केवल 582 करोड़ रुपए ही किए गए। जबकि इस संकट के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही थी।
स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त भर्ती नहीं
रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती और वेतन के लिए मिले 52 करोड़ रुपये में से 30.52 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए। इससे साफ है कि सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त भर्ती नहीं की, जिससे महामारी के दौरान लोगों को इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सरकारी अस्पतालों में बेड की भारी कमी
दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 32 हजार नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 1,357 बेड ही जोड़े गए। राजधानी के कई अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी गई। जहां एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखा गया या मरीजों को फर्श पर इलाज कराना पड़ा।
सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े हैं कई पद
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों में 8,194 पद खाली पड़े हैं। नर्सिंग स्टाफ की 21% और पैरामेडिकल स्टाफ की 38% कमी है। राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की 50-74% कमी पाई गई। वहीं नर्सिंग स्टाफ की 73-96 प्रतिशत तक भारी कमी है।
बड़ी सर्जरी के लिए लंबा इंतजार
लोक नायक अस्पताल में बड़ी सर्जरी के लिए 2-3 महीने और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी के लिए 6-8 महीने का इंतजार करना पड़ा। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय (CNBC) में पीडियाट्रिक सर्जरी के लिए 12 महीने का इंतजार करना पड़ा। CNBC, RGSSH और JSSH जैसे अस्पतालों में कई एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनें बेकार पड़ी रहीं।
बदहाली की हालत में हैं मोहल्ला क्लीनिक
दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक बदहाली की हालत में हैं। 21 मोहल्ला क्लीनिकों में जहां शौचालय नहीं थे तो वहीं 15 क्लीनिकों में बिजली बैकअप की सुविधा नहीं थी। 27 अस्पतालों में से 14 में ICU सेवा उपलब्ध नहीं थी। 16 अस्पतालों में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं थी और 8 अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रही। वहीं 12 अस्पतालों में एंबुलेंस की सुविधा ही नहीं थी, CATS एंबुलेंस भी जरूरी उपकरणों के बिना चलाई जा रही थीं।





