नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । लखनऊ के काकोरी कस्बे में शीतला माता मंदिर के प्रांगण में बीमार दलित बुजुर्ग रामपाल के साथ अमानवीय घटना घटी। सांस की बीमारी से पीड़ित रामपाल के गलती से मंदिर परिसर में पेशाब कर देने पर उन्हें अपमानित किया गया। घटना ने सामाजिक विवाद को जन्म दिया है।
लखनऊ के काकोरी कस्बे में शीतला माता मंदिर परिसर में बीमार दलित बुजुर्ग रामपाल के साथ अमानवीय व्यवहार के बाद तनाव बढ़ गया। स्वामीकांत उर्फ पम्मू ने रामपाल को गालियां दीं और ‘मंदिर अपवित्र’ करने का आरोप लगाया।
बताया गया है कि ‘मंदिर की शुद्धि’ के नाम पर रामपाल को पेशाब चटवाया गया और मंदिर परिसर की सफाई करवाई गई। इस बीच रामपाल को जातिसूचक गालियां देने और मारपीट का भी आरोप लगा है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
शीतला माता मंदिर में अमानवीय व्यवहार का शिकार रामपाल ने काकोरी थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई और न्याय की मांग की है। पुलिस ने शिकायत मिलते ही आरोपी स्वामीकांत उर्फ पम्मू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
एसीपी काकोरी शकील अहमद ने बताया कि तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस मामले को गंभीरता से लेकर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दे रही है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और यूपी कांग्रेस ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश सरकार से आरोपी को दंडित करने और दलित समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पर भी दबाव बढ़ रहा है।
60 वर्षीय दलित बुजुर्ग से अमानवीय व्यवहार
दिवाली के दिन लखनऊ के मंदिर के पास एक 60 वर्षीय दलित बुजुर्ग को कथित तौर पर पेशाब करने के आरोप में जमीन चाटने के लिए मजबूर किया गया। बुजुर्ग के पोते ने बताया कि, दादा को सांस लेने में दिक्कत है और खांसने के दौरान गलती से पेशाब हो गया था।
पुलिस के अनुसार, यह घटना सोमवार शाम करीब 7 बजे हुई। आरोपी ने माना है कि बुजुर्ग को केवल जमीन चाटने के लिए मजबूर किया गया था।
पुलिस शिकायत में, रामपाल रावत ने कहा, “वे मंदिर में पानी पी रहे थे, तभी स्वामीकांत उर्फ पम्मू ने उन पर पेशाब करने का गलत आरोप लगाया। रामपाल ने साफ किया कि उन्होंने पेशाब नहीं किया, बस पानी गिर गया था, लेकिन पम्मू ने उनकी बात नहीं मानी और जातिवादी गालियां देते हुए उन्हें धमकाया। शिकायत में कहा गया है कि पम्मू ने रामपाल को मंदिर परिसर की जमीन चाटने के लिए भी मजबूर किया। यह घटना सामाजिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुकी है।”
मामले में रामपाल रावत के पोते मुकेश कुमार ने बताया कि उनके दादाजी को सांस लेने में गंभीर समस्या है और यदि दवाएं नहीं लेते तो उनकी जान खतरे में रहती है।
मुकेश ने कहा, “दादाजी को खांसी के दौरान गलती से पेशाब हो गया। इसके बाद पम्मू ने उन पर जातिवादी गालियां बरसाईं।” डर के मारे रामपाल ने जब जमीन चाटने को कहा गया तो मजबूरी में ऐसा किया। आरोपियों ने बाद में मंदिर परिसर की सफाई भी करवाई। मुकेश ने बताया कि दादाजी ने रात तक इस घटना की बात किसी से नहीं कही, लेकिन मंगलवार को परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले में सियासत शुरु, कांग्रेस का बड़ा आरोप
कांग्रेस ने X (पूर्व ट्विटर) पर आरोप लगाया कि लखनऊ के शीतला माता मंदिर में एक बुजुर्ग दलित को एक RSS वर्कर ने अपनी गुस्से में जातिसूचक गालियां देते हुए अपना पेशाब चाटने के लिए मजबूर किया। कांग्रेस ने इसे यूपी में BJP की शासन वाली सरकार की दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया।
कांग्रेस के आरोप पर पुलिस का जवाब
पार्टी ने कहा, “यह घटना इंसानियत पर कलंक है और RSS-BJP की मनुवादी सोच की झलक है, जो संविधान को खत्म कर देश में जाति आधारित शोषण बढ़ाना चाहते हैं।” हालांकि, पुलिस ने साफ किया है कि आरोपी का RSS से कोई संबंध नहीं है और मामले की जांच जारी है।
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