नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज का दिन सभी भारतीयों के लिए काफी खास है। दरअसल, महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन का जन्म आज ही के दिन 7 नवंबर 1888 को भारत के तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली में हुआ था। वह विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले एशिया के पहले वैज्ञानिक थे। वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन को प्रकाश परावर्तन के क्षेत्र में खोज करने के लिए वर्ष 1930 में भौतिक शास्त्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था।
सी. वी. रमन की प्राथमिक शिक्षा घर पर ही पूरी हुई थी
वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन का जन्म एक शिक्षित ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक गणित और भौतिकी के अध्यापक थे। इसका भी चंद्रशेखर वेंकटरमन के जीवन में बड़ा असर माना जाता है, जिसकी वजह से उनकी प्रारंभिक स्तर पर ही विज्ञान के प्रति रूचि बढ़ गयी थी। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सी. वी. रमन की प्राथमिक शिक्षा घर पर ही पूरी हुई थी, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए मद्रास(चेन्नई) के प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया था। सी. वी. रमन ने वर्ष 1904 में भौतिकी में स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने उस समय पूरे मद्रास विश्वविद्यालय में टॉप किया था। इसके बाद, सी. वी. रमन ने एम.ए. की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद अपनी वैज्ञानिक की यात्रा शुरू की।
CV Raman की बड़ी खोज ‘रमन प्रभाव’ के रूप में जानी जाती है
महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन की सबसे बड़ी खोज ‘रमन प्रभाव’ के रूप में जानी जाती है। इसके लिए ही उन्हें वर्ष 1930 में भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। ‘रमन प्रभाव’ वह खोज है, जिसमे जब प्रकाश की किरण किसी पारदर्शी पदार्थ से होकर गुजरती है, तो उसकी तरंग दैर्ध्य में परिवर्तित हो जाती है। चंद्रशेखर वेंकटरमन की इस खोज ने वैज्ञानिकों को परमाणुओं और अणुओं की संरचना को समझने के लिए नया तरीका प्रदान कर दिया। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 1928 को सी. वी. रमन की इस खोज के ऐलान के कारण भारत में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।




