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Thursday, March 5, 2026
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सीताराम येचुरी: कैसे एक तेलुगु ब्राह्मण का लड़का बन गया वामपंथी राजनीति का केंद्र, कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर?

सीताराम येचुरी भारतीय वामपंथ राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक थे। सीताराम येचुरी का जन्म एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आज सीताराम येचुरी का निधन हो गया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी (Sitaram Yechuri) का आज गुरुवार को दिल्ली के AIIMS अस्पताल में निधन हो गया। उनके फेफड़ों में संक्रमण हो गया था। जिसके उपचार के लिए उन्हें 19 अगस्त को एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां ICU में उनका इलाज चल रहा था। 

सीताराम येचुरी भारतीय वामपंथ राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक थे। सीताराम येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को चेन्नई के एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वेश्वर सोमयाजुला येचुरी था। वो आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में इंजीनियर थे। उनकी मां एक सरकारी अधिकारी थीं। 

12वीं में पूरा देश किया था टॉप

Sitaram Yechuri की परवरिश हैदराबाद में हुई थी। वो हैदराबाद के ऑल सेंट हाईस्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की थी। इसके बाद साल 1969 में आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली आए और यहां के प्रेसिडेंट स्कूल नई दिल्ली में दाखिला ले लिया। सीताराम ने CBSE बोर्ड से 12वीं की परीक्षा में पूरे भारत में टॉप किया था। फिर दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में BA किया। BA की पढ़ाई पूरी होने के बाद येचुरी ने जेएनयू में दाखिला लिया। वहां से येचुरी ने अर्थशास्त्र में PG किया। इसके बाद उन्होंने JNU से ही पीएचडी करने का फैसला किया। उन्होंने PHD के लिए दाखिला भी ले लिया था, लेकिन इमरजेंसी में जेल चले जाने के कारण उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी नहीं कर सके।

कैसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर

Sitaram Yechuri का राजनीतिक सफर 1974 से शुरू हुआ था। उन्होंने पहले 1974 में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) को ज्वॉइन किया। इसके बाद साल 1975 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े। इमरजेंसी में विरोध प्रदर्शन के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा था। इमरजेंसी के बाद सीताराम येचुरी 1977-78 में तीन बार JNU छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। पहले वो SFI के पहले अध्यक्ष बने जो केरल या बंगाल से नहीं था। इसके बाद वो 1984 में CPI(M) की केंद्रीय समिति के लिए चुने गए। इसके बाद उन्होंने 1986 में SFI से इस्तीफा दे दिया।

CPI(M) के लगातार 3 बार बने महासचिव

SFI से इस्तीफा देने के बाद Sitaram Yechuri ने एक बार फिर CPI(M) का रुख किया। 1992 में वो 14वीं कांग्रेस में पोलित ब्यूरो के लिए चयनित हुए। इसके बाद 2005 से लेकर 2017 तक वो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद चुने गए। इसी दौरान 19 अप्रैल 2015 को CPI(M) का पांचवां महासचिव बनाया गया। अप्रैल 2018 में उन्हें एक बार फिर पार्टी महासचिव की कमान सौंपी गई। इसके बाद अप्रैल 2022 में येचुरी को लगातार तीसरी बार CPI(M) के महासचिव बनाया गया। 

एक तेलुगु ब्राह्मण लड़का कैसे बना कट्टर वामपंथी

Sitaram Yechuri राजनीति में जैसे ही सक्रिय हुए। उसी समय देश में आपातकाल लग गया। इसकी वजह से 1975 में उन्हें जेल जाना पड़ा। जेल की सलाखों से जब येचुरी बाहर आए तब उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता बदल चुकी थी। देश में लोकतंत्र की बहाली की लड़ाई के लिए वो अंडरग्राउंड हो गए। यही समय उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ था। इसी वक्त सीताराम येचुरी की राजनीतिक झुकाव वामपंथ की तरफ हो गया। इसके बाद जैसे-जैसे दिन बीते वो वामपंथ की विचारधारा को बढ़ाते चले गए।

कोरोना में बेटे की हो गई थी मौत

सीताराम येचुरी (Sitaram Yechuri) के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन 2021 में जैसे येचुरी के उपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दरअसल सीताराम येचुरी के 34 साल के बेटे आशीष येचुरी की साल 2021 में कोरोना महामारी के दौरान मौत हो गई। येचुरी की पत्नी सीमा चिश्ती पेशे से पत्रकार हैं। एक इंटरव्यू में सीताराम येचुरी ने बताया था कि उनके घर का आर्थिक रूप से भरण पोषण उनकी पत्नी सीमा चिश्ती ही कर रही हैं। 

सीताराम येचुरी ने की थी दो शादियां

बता दें कि, सीमा चिश्ती, सीताराम येचुरी की दूसरी पत्नी हैं। सीताराम की पहली पत्नी इंद्राणी मजूमदार थीं। जो वामपंथी कार्यकर्ता और फेमिनिस्ट डॉ. वीना मजूमदार की बेटी थीं। इंद्राणी मजूमदार से उनको एक बेटा और एक बेटी हुए। जिसमें बेटी का नाम अखिला येचुरी और बेटा आशीष येचुरी हैं। हालांकि आशीष की 2021 में मौत हो गई थी।

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