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Monday, March 16, 2026
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सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कोर्ट ने की खारिज, बिना नागरिकता वोटर बनने का था आरोप

सोनिया गांधी के खिलाफ बिना नागरिकता के वोटर बनने को लेकर दिल्‍ली की एक अदालत में FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग को खारिज कर दिया है। एक वकील द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया था कि भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में दर्ज कर लिया गया था, जो कानून का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की, लेकिन उनका नाम 1980 की दिल्ली मतदाता सूची में पहले से ही मौजूद था। वकील ने अदालत से दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच का निर्देश देने की अपील की थी। हालांकि, कोर्ट ने मामले की जांच या FIR दर्ज करने की जरूरत को अस्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

याचिकाकर्ता ने अदालत में दायर अपनी शिकायत में कई गंभीर सवाल उठाए। उसका कहना था कि जब सोनिया गांधी इटली की नागरिक थीं, तो फिर उनका नाम 1980 की भारतीय मतदाता सूची में कैसे दर्ज हुआ? याचिका में यह भी कहा गया कि 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया, लेकिन इस फैसले के पीछे की वजह कहीं दर्ज नहीं की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना न केवल गंभीर अनियमितता है, बल्कि यह एक संभावित जालसाजी का मामला भी हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और एफआईआर दर्ज कराने की याचिका को खारिज कर दिया।

क्या फर्जी डॉक्यूमेंट्स का सहारा लिया? 

शिकायतकर्ता की ओर से यह सवाल उठाया गया कि 1983 में नागरिकता लेने से पहले आखिर कौन से दस्तावेज के आधार पर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया? उन्होंने यहां तक दावा किया कि क्या सोनिया गांधी ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स का सहारा लिया? याचिका में यह भी कहा गया कि उन्होंने अप्रैल 2023 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की, जो उनके मतदाता सूची में नामांकन से पहले की बात है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह 1983 और 2023 के बीच की तारीख को लेकर कोई गलती की गई थी या टाइपिंग त्रुटि थी। शिकायतकर्ता ने कोर्ट से FIR दर्ज करने और दिल्ली पुलिस को जांच का आदेश देने की अपील की थी। लेकिन कोर्ट ने इस याचिका पर गहन सुनवाई के बाद यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इन आरोपों में कोई आपराधिक आधार नहीं बनता। अदालत ने याचिकाकर्ता के दावों को अस्वीकार्य और कानूनी रूप से कमजोर माना।

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