नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की वह पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने वाराणसी की विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला सितंबर 2024 में अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान से जुड़ा है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
जस्टिस समीर जैन ने 3 सितंबर को मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। इससे पहले हाईकोर्ट ने आदेश आने तक विशेष न्यायाधीश के निर्देश पर रोक लगाई थी।
राहुल गांधी की दलील
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि प्रतिवादी की ओर से दाखिल अपील में बयान की तारीख का उल्लेख तक नहीं है। जब तक पूरा बयान सामने नहीं आता, यह तय नहीं किया जा सकता कि राहुल ने किस संदर्भ में बात कही। निचली अदालतों ने इस पर विचार ही नहीं किया कि प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता है या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट में कहा, राहुल गांधी का यह बयान विदेश में भारत के खिलाफ दिया गया। प्राथमिकी दर्ज करने का फैसला मजिस्ट्रेट का अधिकार क्षेत्र है। सितंबर 2024 में अमेरिका के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कथित रूप से कहा था कि “भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है। इस बयान को भड़काऊ और विभाजनकारी बताते हुए वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई। 28 नवंबर 2024 को अदालत ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि बयान विदेश में दिया गया, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसे 21 जुलाई 2025 को मंजूर कर लिया गया। इसी आदेश को राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामला फिर से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी की अदालत में सुना जाएगा। वहाँ तय होगा कि राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो या नहीं।





