नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र की सियासत में जहां इन दिनों गहमागहमी और बयानबाजी चरम पर है, वहीं सोमवार को विधान भवन परिसर में एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी एमएलसी प्रवीण दरेकर के बीच हुई संक्षिप्त बातचीत ने सभी का ध्यान खींचा। क्योंकि दोनों नेताओं को राजनीतिक रूप से एक दूसरे के विरोधी के रूप में देखा जाता है।
दरअसल, यह मुलाकात विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान हुई, जब प्रवीण दरेकर ने उद्धव ठाकरे को एक स्वपुनर्विकास परियोजना से जुड़ी रिपोर्ट सौंपी। बातचीत की शुरुआत रिपोर्ट को लेकर हुई, लेकिन माहौल जल्दी ही सहज हो गया और दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की अनौपचारिक बातचीत शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान उद्धव ठाकरे ने मुस्कुराते हुए दरेकर से कहा, “शिवसेना में वापस आ जाओ…”।
“मैं 100 प्रतिशत शिवसैनिक हूं” – प्रवीण दरेकर
मुलाकात के दौरान प्रवीण दरेकर ने खुद को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे का “100 प्रतिशत शिवसैनिक” बताया। इस पर उद्धव ठाकरे मुस्कराए बिना नहीं रह सके। उन्होंने हल्के अंदाज में चुटकी लेते हुए कहा, “तो फिर उन नकली शिवसैनिकों से भी कहो कि वे ईमानदार बनें। अगर तुम सच में मराठी लोगों के हित में काम कर रहे हो, तो हम साथ काम कर सकते हैं। लेकिन उसके लिए तुम्हें शिवसेना में लौटना होगा।” इस पूरे संवाद ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, खासकर ऐसे समय में जब महाराष्ट्र की राजनीति दो खेमों में बंटी हुई है।
दरेकर का राजनीतिक सफर
गौरतलब है कि प्रवीण दरेकर पहले शिवसेना का हिस्सा थे, इसके बाद उन्होंने मनसे (MNS) जॉइन की और फिलहाल वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में सक्रिय हैं। उद्धव ठाकरे की ओर से दिया गया “नकली शिवसैनिक” वाला बयान, साफ तौर पर उस शिवसेना गुट पर कटाक्ष था जो अब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम कर रहा है।
राजनीतिक तल्खी के बीच आई हल्की मुस्कान
उद्धव ठाकरे ने बातचीत के दौरान कहा, “अगर तुम्हारे इरादे साफ हैं, तो मैं हमेशा संवाद के लिए तैयार हूं।” इस पर प्रवीण दरेकर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “बिलकुल, चलो हम सब फिर एक साथ आएं।” यह अनौपचारिक और सौहार्दपूर्ण संवाद वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के लिए हैरानी और खुशी का कारण बना। जून 2022 में शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद से बीजेपी और ठाकरे गुट के बीच जहां लगातार तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखी गई है, वहीं यह क्षण राजनीतिक तनाव के बीच एक सकारात्मक और सुलझा हुआ संकेत माना जा रहा है।
राजनीति में रिश्ते स्थायी नहीं होते
2019 में जब महा विकास आघाड़ी (MVA) का गठन हुआ, तभी से भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) के रिश्तों में तीखापन आ गया था। दोनों दल एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक विरोधी बन गए थे। लेकिन हालिया बातचीत में जिस तरह हंसी-मजाक, सहजता और पुराने रिश्तों की झलक देखने को मिली, वह इस बात का संकेत है कि राजनीति में दरवाजे कभी पूरी तरह बंद नहीं होते। परिस्थिति और समय के साथ रिश्तों में बदलाव मुमकिन है।





