नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था और एनकाउंटर नीति पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की नीति हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू होती है। अगर कोई अपना भी कानून तोड़ेगा, तो उसके साथ भी वही कार्रवाई होगी जो माफिया या अपराधियों पर होती है।
सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि सरकार ने हमेशा कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने की कोशिश की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं जब सामने वाला व्यक्ति कानून से डरता ही नहीं, तब तत्काल स्थिति में सख्ती जरूरी हो जाती है। एनकाउंटर पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अपराधी के पास हथियार चलाने की आजादी होती है, तो पुलिस को भी आत्मरक्षा और कानून लागू करने के लिए सशक्त किया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि पुलिस को उसी भाषा में जवाब देना पड़ता है, जिसे अपराधी समझता है, फिर लोग कहते हैं कि पुलिस ने गोली क्यों मार दी, अब पुलिस गोली न मारे तो क्या खाए।
योगी ने बताई जीरो टॉलरेंस की वजह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में हालात बेहद खराब थे। उस दौर में 900 से अधिक दंगे हुए और शायद ही कोई शहर ऐसा रहा हो जहां कर्फ्यू न लगा हो। उन्होंने कहा कि उस समय उद्योगपति, डॉक्टर और कारोबारी सभी को जबरन ‘गुंडा टैक्स’ देना पड़ता था। सीएम योगी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री और पार्टी ने उन्हें प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी, तो सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था को सुधारने के साथ-साथ आम नागरिकों के मन में भरोसा पैदा करना था। उन्होंने साफ किया कि यह काम चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई करके संभव नहीं था। इसी वजह से सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई, जो सभी पर समान रूप से लागू होती है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अगर कोई अपना भी कानून तोड़ता है, तो उसके साथ भी वही कार्रवाई होगी जो किसी माफिया या अपराधी के खिलाफ की जाती है।
एनकाउंटर पर CM योगी का जवाब
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने हमेशा कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने का प्रयास किया है, लेकिन कुछ हालात ऐसे होते हैं जब सामने वाला व्यक्ति कानून का कोई डर नहीं दिखाता। ऐसे में उसे कानून की भाषा में समझाना तत्काल आवश्यकता बन जाती है।
एनकाउंटर पर उठने वाले सवालों पर सीएम योगी ने कहा कि अक्सर लोग पूछते हैं कि पुलिस ने गोली क्यों चलाई। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर पुलिस गोली नहीं चलाएगी, तो क्या उसे खुद गोली खानी चाहिए? दोनों बातें एक साथ संभव नहीं हैं। अगर अपराधी के पास हथियार चलाने की आजादी है, तो पुलिस को भी उसका सामना करने के लिए पिस्तोल दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी नीति के चलते पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में बड़े सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। आज न तो दंगों की चर्चा होती है, न जबरन वसूली, न अराजकता और न ही फिरौती की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में हालात स्थिर हैं और उत्तर प्रदेश अब एक मजबूत निवेश गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।





