नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ने विदेशी और कूटनीतिक मामलों को लेकर केरल और पश्चिम बंगाल सरकार को चेतावनी दी है और केंद्र के वर्किंग स्पेस में दखल देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। केंद्र ने इन राज्यों को विदेशी मामलों में किसी भी प्रकार का दखल नहीं देने की सलाह देते हुए इसे संविधान विरोधी बताया है।
बांग्लादेश हिंसा को लेकर ममता बनर्जी ने दिया था बयान
दरअसल बांग्लादेश में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन और हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एक बयान जारी किया था। जिसमें उन्होंने बांग्लादेश से भाग के आए लोगों को बंगाल में पनाह देने की बात कही थी। जिसको लेकर केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों को कड़ी चेतावनी दी है और उसके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा है। केंद्र सरकार ने इसी सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम बंगाल सरकार को चेतावनी दी थी कि शरणार्थियों के मुद्दे पर उसका कोई अधिकार नहीं है। इसके अलावा केरल सरकार ने हाल ही में विदेशी मामलों में सहयोग के लिए एक सचिव की नियुक्ति की है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि केंद्र के मामलों में हस्तक्षेप ना करें राज्य
विदेश मंत्रालय ने इस विषय को लेकर कहा कि संविधान की 7वीं अनुसूचि की सूची-1 के आइटम-10 में स्पष्ट रूप से निर्देशित है कि विदेश मामले और सभी मामले जो संघ के किसी दूसरे देश के साथ संबंध जुड़े हैं, पर केवल और केवल केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है। यह समवर्ती या राज्य का विषय नहीं है। राज्य सरकारों को उन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये, जो उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
ममता के बयान पर भड़क गई थी बांग्लादेश सरकार
बता दें कि, ममता बनर्जी के इस बयान पर बांग्लादेश की सरकार ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। बांग्लादेश सरकार ने कहा था कि ममता बनर्जी का बयान भड़काऊ और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है। बांग्लादेश सरकार सरकार समझती है कि जब हालात सामान्य हो रहे हैं तो पश्चिम बंगाल की सीएम इस तरह के बयान देकर स्थिति को बिगाड़ सकती है।
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