नई दिल्ली/रफ़्तार डेस्क। हरियाणा में ज़मीन खरीदना अब महंगा हो जाएगा, राज्य सरकार अगस्त महीने से प्रॉपर्टी के संशोधित कलेक्टर रेट लागू करने जा रही है। ये रेट राज्य के अलग-अलग ज़िलों की वेबसाइट पर ड्राफ्ट के तौर पर डाल दिए गए हैं। जनता से 31 जुलाई तक आपत्तियाँ मांगी गई थीं। प्रॉपर्टी के संशोधित कलेक्टर रेट 1 अगस्त से लागू हो सकते हैं। कांग्रेस ने इस फ़ैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा, इससे ज़मीन की कीमतें बढ़ेंगी और आम लोगों पर बोझ बढ़ेगा।
क्या है कलेक्टर रेट?
बता दें, हरियाणा में ज़मीन खरीदना अब महंगा साबित हो सकता है, कलेक्टर रेट यानी वो न्यूनतम दर जिस पर कोई भी प्रॉपर्टी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होती है, इसी दर के हिसाब से रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी लगती है। अगर ये दर बढ़ती है, तो ज़मीन खरीदना सीधे तौर पर महंगा हो जाएगा।
गुरुग्राम में सबसे ज़्यादा उछाल
गुरुग्राम में ज़मीन की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। हाईवे से सिर्फ़ दो एकड़ की दूरी पर बसे गाँवों में ज़मीन की कीमत पहले 25,300 रुपये प्रति वर्ग गज थी, अब इसकी कीमत 45,000 रुपये प्रति वर्ग गज प्रस्तावित है। यानी 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी, कार्टरपुरी क्षेत्र में 25 प्रतिशत और ओल्ड डीएलएफ कॉलोनी में 19 प्रतिशत प्रस्तावित है।
जानिए ज़िलों में क्या है स्थिति?
रोहतक: 5 से 25 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम
पंचकूला: भारी बढ़ोतरी में कई सेक्टर शामिल हैं।
औद्योगिक क्षेत्र: यहाँ भी दाम बढ़ाने की तैयारी है।
इस बारे में हरियाणा सरकार का कहना है कि ये बदलाव बाज़ार दरों के हिसाब से किए जा रहे हैं, ताकि रजिस्ट्री में कोई गड़बड़ी न हो।
कांग्रेस का विरोध, हुड्डा का हमला
पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस फ़ैसले को ग़रीब और मध्यम वर्ग पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कलेक्टर रेट में 10 से 145 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद में जहाँ पहले ज़मीन का रेट 15,000 रुपये था, अब उसे बढ़ाकर 35,000 रुपये कर दिया गया है। दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि पिछले साल दिसंबर में ही कलेक्टर रेट में भारी वृद्धि की गई थी और अब 8-9 महीनों में दूसरी बार फिर से दरें बढ़ाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
इस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कांग्रेस शासन में भी दरें बढ़ाई गई थीं। नई दरें लोगों पर बोझ नहीं डालेंगी, बल्कि बाज़ार में प्रचलित दरों से मेल खाती हैं। कांग्रेस का कहना है कि आमतौर पर कलेक्टर रेट में 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि होती थी, लेकिन अब हर गली, मोहल्ले और गाँव के लिए अलग-अलग भारी कीमतें तय की जा रही हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्ग की कमर टूट जाएगी और उनका घर खरीदने का सपना और भी दूर हो जाएगा।





