नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में अवैध धर्मांतरण के मामलों में मुख्य आरोपी झांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन पर शिकंजा कसता जा रहा है। अब प्रशासन ने उनकी लग्जरी कोठी पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को भारी सुरक्षा के बीच प्रशासन की टीम ने कोठी पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस चस्पा किया।
प्रशासन का आरोप है कि झांगुर बाबा की यह कोठी सरकारी जमीन पर गैरकानूनी रूप से बनाई गई है। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि सात दिन के भीतर अतिक्रमण स्वयं हटा लिया जाए, अन्यथा बुलडोजर चलाकर इसे जबरदस्ती हटाया जाएगा। बुलडोजर कार्रवाई की संभावनाएं अब तेज हो गई हैं। यह नोटिस बाबा की कथित सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन के नाम पर जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि तय समयसीमा में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित है।
झांगुर बाबा की कोठी पर अब प्रशासन का चलेगा बुलडोजर
प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह कोठी सरकारी भूमि गाटा संख्या 337/370, रकबा 0.0060 हेक्टेयर पर अवैध रूप से निर्मित है। झांगुर बाबा और उसके सहयोगियों के खिलाफ जमीन से बेदखल करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया, तो बलरामपुर प्रशासन जबरन बुलडोजर चलाकर निर्माण को गिरा देगा।
पुणे में करोड़ों रुपये की संपत्ति
कोतवाली उतरौला के प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने बताया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश एटीएस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों से प्राप्त निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले, जांच में यह सामने आया था कि झांगुर बाबा की पुणे में करोड़ों रुपये की संपत्ति है। उसने लोनावला में करीब 16 करोड़ रुपये की एक प्रॉपर्टी खरीदी थी, जिसमें उसने नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन और अपने सहयोगी मोहम्मद अहमद खान को साझेदार बनाया था। उसी साझेदारी के तहत बलरामपुर में तैनात सीजेएम कोर्ट के क्लर्क राजेश उपाध्याय की पत्नी संगीता को भी लाभांश की हिस्सेदार बनाया गया। बताया गया है कि राजेश उपाध्याय, झांगुर बाबा के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कोर्ट में मुकदमे दर्ज कराने के लिए मदद करता था और इसी के बदले में उसकी पत्नी को पुणे की संपत्ति में हिस्सेदारी दी गई थी।




