नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार के गया जिले की नीलांजना नदी पर करीब 13 करोड़ की लागत से बना पुल मॉनसून के पहली बारिश में ढहने के कगार पर पहुंच गया है। इसे लेकर ग्रामीणों में गुस्सा है। तो वहीं, मामला सामने आने पर वरीय पदाधिकारी और अधिकारी इस पर लीपापोती करने में लगे हुए है। पुल में दरार आने से करीब 60 गांव के लोगों के लिए आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो रही है, इससे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
डोभी प्रखंड अंतर्गत कोठवारा से वरिया तट तक नीलांजना नदी पर नाबार्ड योजना के तहत बना 13.09 करोड़ रुपये के पुल का निर्माण दिसंबर 2022 में पूरा हो गया था। लेकिन, दो साल गुजर जाने के बाद भी इस पुल का उद्घाटन हुआ और न ही इस उपयोग किया गया। अब पुल के दो पाये धंस गये हैं और जगह-जगह बड़े-बड़े दरारें आ गई।
ऐसे में पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही से हादसे का खतरा बढ़ गया है। वही, जैसे ही पुल धंसने की जानकारी मिली, स्थानीय पदाधिकारी और निर्माण निगम के अधिकारी आनन-फानन में निरीक्षण के लिए पहुंचे। वहां, मौजूद ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेर लिया और जमकार खोरी-खोटी सुनाई।
वही, ग्रामीणों को आरोप है कि, संवेदक तिरुपति बालाजी कंस्ट्रक्शन की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग कर पुल का निर्माण किया गया। और निर्माण के दौरान भी पुल का एक हिस्सा गिरा था, लेकिन अधिकारी इसे अचानक नदी में पानी आने की बात कहकर दबा गये।
सात साल बाद बना, फिर भी नहीं हुआ उद्घाटन
पुल का शिलान्यास वर्ष 2015 में ही तत्कालीन विधायक ने किया था। 7 साल बीत जाने के बाद भी आज तक इस पुल का उद्घाटन नही हो सका। उद्घाटन से पहले ही पुल क्षतिग्रस्त होने लगा। यह पुल डोभी और बाराचट्टी प्रखंड के करीब 40 गांवों और झारखंड के लगभग 20 गांवों के लोगों की जीवन रेखा माना जाता है। बरसात के दिनों में नदी पार करने का एक मात्र यह पुल था। लेकिन ये भी अब सुरक्षित नहीं है।
क्षतिग्रस्त पुल पर आवागमन बंद
उल्लेखनीय है कि यह पुल करीब ढाई साल पहले बनाया था, लेकिन औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ है। गुरुवार को पुल के चौथे पाये के धंस जाने के कारण पुल की संरचना कई जगहों पर दरकने लगी है और इसका झुकाव नदी की ओर बढ़ा है। शुक्रवार को किये गये निरीक्षण के बाद पता चला कि फिलहाल पुल की स्थिति खराब है। इसलिए पुल पर आवागमन रोकने के निर्णय लिया है। इस निर्णया से करीब 60 गांवों के लोग प्रभावित हो गये हैं।
जांच और कार्रवाई के निर्देश
मिली जानकारी के मुताबिक, जिला कार्यपालक अभियंता ने निर्देश दिया है कि पुल के लेवल की जांच दिन में तीन बार की जाये और दोनों छोर पर चेतावनी बोर्ड लगाकर भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी जाये। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण के दौरान की गयी गड़बड़ियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी।





