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Monday, April 6, 2026
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‘पार्टी ने जो कहा वो किया, 2029 में ही क्यों, 2026 में भी तो…’ सियासत में वापसी पर स्मृति ईरानी का बड़ा बयान

एक मीडिया चैनल से बातचीत में बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने अपने पॉलिटिकल कमबैक को लेकर बात की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी 2029 में क्या कहें, ये ना तो मैं जानती हूं और ना आप जानते हैं।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । भारतीय जनता पार्टी की फायरब्रांड नेता और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी लोकसभा चुनाव 2024 में मिली हार के बाद राजनीति में ज्‍यादा सक्रिय रुप से भाग लेती नजर नहीं आ रही हैं। लेकिन इस बीच उन्‍होने अपने सियासी सफर ओर राजनीति में वापसी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। 

एक मीडिया चैनल से बातचीत में बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने अपने पॉलिटिकल कमबैक को लेकर भी बात की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी 2029 में क्या कहें, ये ना तो मैं जानती हूं और ना आप जानते हैं। BJP 2029 में ही क्यों कहेगी, बीजेपी 2026 कुछ बोल दे… 2025 में कुछ बोल दे तो।

उन्होंने कहा कि मेरा ये मानना है कि मेरे बारे में चर्चाएं बहुत होती हैं। मेयर के चुनाव से लेकर सांसद तक के चुनावों में मेरा नाम लिया जाता है। मेरी बात की जाती है, क्योंकि मेरा नाम स्मृति ईरानी है।

’49 में तो कई लोगों का करियर शुरू होता है’

उन्होंने कहा कि वह राजनीति से अलग नहीं हो रही है। अभी तो सियासत की लंबी पारी खेलनी है। 49 की उम्र में लोगों का करियर शुरू होता है। मैं तो 3 बार की सांसद रह चुकी हूं। 5 विभागों की मंत्री रह चुकी हूं, अभी तो लंबा चलेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी कब कहां क्या दायित्व देने ये मुझे नहीं पता। मुझे इतना पता है कि संसद के माध्यम से मैंने अपनी काबिलियत को साबित किया है।

‘मैंने धरनों वाली पॉलिटिक्स भी की’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने 10 साल UPA की सरकार के वक्त भी राजनीति की है। बहुत सारे धरने प्रदर्शन किए है। मैंने 10 साल धरनों वाली पॉलिटिक्स भी की है, जेल भी गई। मैंने अमेठी में उस वक्त भी काम किया जब यूपी में अखिलेश यादव की सरकार थी और मैंने अमेठी में चुनाव तब लड़ा जब देश में UPA की सरकार थी। मतलब मैं मौत के कुएं में छलांग… वो सब मैं कर चुकी हूं।’

‘कोई भी राजनेता ऐसी सीट नहीं चुनता’

स्‍मृति ईरानी अमेठी के इतिहास का जिक्र कर कहती है‍ कि अमेठी कभी जीतने वाली सीट थी ही नहीं, अमेठी में कई राजनीतिक दिग्गज हारे, शरद यादव हारे। मेनका गांधी खुद हारी जो कि गांधी परिवार से हैं। गांधी परिवार ने उस सीट को चुना ही इस वजह से था, क्योंकि वहां का सामाजिक समीकरण ऐसा था कि जो वोट पड़े वो सिर्फ उस परिवार को पड़े। तो कोई भी समझदार राजनेता ऐसी सीट नहीं चुनता, जहां उसकी हार निश्चित हो।

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