नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। पार्टी जल्द ही एक इंटरनल सर्वे कराने जा रही है, जिसमें सभी विधायकों की परफ़ॉर्मेंस और जनता में पकड़ की जांच होगी। इस खबर के सामने आते ही यूपी बीजेपी के विधायकों में बेचैनी बढ़ गई है।
इंटरनल सर्वे से होगी परफॉर्मेंस की जांच
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने साफ कर दिया है कि इस बार टिकट उन्हीं को मिलेगा, जो जनता के बीच सक्रिय और लोकप्रिय हैं। अगर किसी विधायक की रिपोर्ट कमजोर आती है तो उनका टिकट कटना तय है। बताया जा रहा है कि पार्टी 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों का टिकट काट सकती है। पार्टी किसी निजी एजेंसी को सर्वे की जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है ताकि रिपोर्ट निष्पक्ष हो। यह सर्वे तीन स्तर पर होगा संगठन की राय, जनता का फीडबैक और चुनावी संभावना का आंकलन पर किया जाएगा।
सपा का PDA बना BJP की टेंशन
BJP जहां तीसरी बार यूपी में सत्ता में आने की तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी का PDA फार्मूला उसकी राह मुश्किल बना रहा है। अखिलेश यादव लगातार जनता के मुद्दे उठा रहे हैं और बीजेपी को सीधी चुनौती दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी सपा के बागियों को भी मौका देकर सपा को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर सकती है। चायल से सपा विधायक पूजा पाल का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। हाल ही में उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की थी। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं और उन्हें टिकट भी मिल सकता है। इसके अलावा सपा के बागी विधायक अभय सिंह, मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह समेत कई अन्य नेताओं को भी बीजेपी मौका दे सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार ने बताई वजह
वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह का कहना है कि बीजेपी हमेशा चुनाव से पहले इंटरनल सर्वे कराती रही है। 2017 और 2022 में मोदी और योगी की लहर में कई विधायक जीत गए, लेकिन इस बार मुकाबला कठिन है। ऐसे में पार्टी कमजोर परफॉर्मेंस वाले विधायकों पर दांव लगाने का जोखिम नहीं उठाएगी। बीजेपी का यह इंटरनल सर्वे सिर्फ विधायकों के टिकट तय करने का काम नहीं करेगा, बल्कि इससे पार्टी को हर सीट पर रणनीति बनाने का मौका भी मिलेगा। साफ है कि 2027 में बीजेपी जीत की हैट्रिक लगाने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती।





