नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। सूबे की राजनीति में कई बड़े चेहरे रहे हैं, लेकिन पिछले दो दशकों में बिहार की सियासत काफी हद तक नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। कहा जाता है कि बिहार में सरकार किसकी बनेगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि नीतीश कुमार किसके साथ खड़े हैं। उनका राजनीतिक सफर जितना चर्चा में रहा है, उतनी ही उनकी निजी जिंदगी हमेशा सादगी और गोपनीयता में रही है।
स्कूल टीचर से हुआ था प्यार
नीतीश कुमार की पत्नी का नाम मंजू कुमारी सिन्हा था। वह पटना के एक स्कूल में शिक्षिका थीं। युवावस्था के दिनों में नीतीश कुमार को उनसे प्यार हो गया। दोनों अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से थे नीतीश कुमार ओबीसी समुदाय से आते हैं, जबकि मंजू कुमारी एक सामान्य कायस्थ परिवार से थीं। इसके बावजूद दोनों ने समाज की परवाह किए बिना इंटर-कास्ट मैरिज की। उनकी प्रेम कहानी सादगी और आपसी समझ की मिसाल मानी जाती है।
परिवार को राजनीति से रखा दूर
नीतीश कुमार और मंजू कुमारी का एक बेटा है, जिसका नाम निशांत कुमार है। निशांत राजनीति से दूर रहते हैं। उन्होंने बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और निजी जीवन में रहना पसंद करते हैं। नीतीश कुमार ने हमेशा अपने परिवार को राजनीति की चमक-दमक से दूर रखा। साल 2007 में मंजू कुमारी का निधन हो गया। उस समय वह दिल्ली में थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने अंतिम समय में अपने पति के साथ रहें और उन्हीं के साथ अपनी आखिरी सांस लें। लेकिन उस समय नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री थे और सरकारी जिम्मेदारियों के कारण दिल्ली नहीं पहुंच सके। पत्नी की यह आखिरी इच्छा अधूरी रह गई। कहा जाता है कि पत्नी के निधन के बाद नीतीश कुमार पूरी तरह टूट गए थे। उन्होंने खुद पत्नी की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम संस्कार के दौरान फूट-फूटकर रो पड़े। वह कई बार इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि वह अपनी पत्नी की आखिरी इच्छा भी पूरी नहीं कर पाए यह मलाल उन्हें आज भी है। नीतीश कुमार को सादगी पसंद है। वे बेहद साधारण जीवन जीते हैं और निजी जीवन को सार्वजनिक मंचों से दूर रखते हैं। उनकी राजनीति जितनी मजबूत और रणनीतिक रही है, निजी जीवन उतना ही शांत और सीमित दायरे में रहा है। बिहार की राजनीति में मजबूत पहचान रखने वाले नीतीश कुमार के जीवन का यह भावुक पहलू कम ही लोगों को पता है। सत्ता और जिम्मेदारियों के बीच एक पति का दर्द भी छिपा है, जो अपनी पत्नी की आखिरी इच्छा पूरी न कर पाने का मलाल आज तक अपने दिल में लिए हुए है। उनके 75वें जन्मदिन पर यह किस्सा उनके जीवन के उस मानवीय पक्ष को सामने लाता है, जिसे राजनीति की हलचल में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।





