नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आज 50वां जन्मदिन है। हालांकि इस बार का जन्मदिन उनके लिए भावनाओं से भरा है, क्योंकि वे अपने पिता और JMM के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन से शोक में हैं। इसके बावजूद वे रामगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास से सरकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। हेमंत ने कहा कि जनता का समर्थन उनके और उनके परिवार के लिए एक मजबूत ढाल है।
पिता के बाद अब संगठन की बागडोर
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने वाले हेमंत सोरेन को अब JMM का सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुन लिया गया है। 1987 से 2025 तक पार्टी के अध्यक्ष रहे शिबू सोरेन ने खुद अपने बेटे के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे हजारों की भीड़ ने तालियों और नारों से समर्थन दिया। अब हेमंत सोरेन संगठन और सरकार, दोनों की कमान संभालेंगे। 10 अगस्त 1975 को हजारीबाग जिले के नेमरा गांव में जन्मे हेमंत सोरेन का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। पिता आंदोलन में व्यस्त रहते, मां रुपी किस्कू ने चारों बच्चों की परवरिश अकेले की। हेमंत ने गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू की, फिर पटना के MG हाई स्कूल और रांची के BIT मेसरा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन राजनीति में आने के लिए पढ़ाई छोड़ दी।
राजनीति में शुरुआती दौर
2003 में झारखंड छात्र मोर्चा के अध्यक्ष बने। 2005 में पहली बार दुमका से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2009 में बड़े भाई दुर्गा सोरेन के निधन के बाद वे राजनीतिक उत्तराधिकारी बने और उसी साल राज्यसभा सदस्य चुने गए। बाद में दुमका से विधायक बने और 2010 में अर्जुन मुंडा सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। 2013 में कांग्रेस और RJD के साथ मिलकर सरकार बनाई और पहली बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि 17 महीने बाद 2014 के चुनाव में हार गए। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने आदिवासी भूमि कानूनों और पहचान से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया। 2019 में JMM-कांग्रेस-RJD गठबंधन ने बहुमत हासिल किया और हेमंत दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल के दौरान 2024 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में उन्हें पांच महीने के लिए जेल जाना पड़ा। इस दौरान उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने पार्टी को संभाला और मजबूत किया। जेल से लौटने के बाद हेमंत ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।




