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Sunday, April 5, 2026
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बिहार : एमएलसी चुनाव में राजद के 3 भूमिहार उम्मीदवार जीते

पटना, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने जहां एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण की राजनीति की और 15 साल तक राज्य पर शासन किया, वहीं उनके बेटे तेजस्वी उच्च जाति के लोगों की भागीदारी के साथ बिहार में नए समीकरण तलाश रहे हैं। ऐसा ही एक प्रतिबिंब बिहार से आया है, जब भूमिहार (उच्च जाति) के 3 राजद उम्मीदवारों ने गुरुवार को एमएलसी चुनाव जीता। पटना से राजद प्रत्याशी कार्तिक कुमार उर्फ कार्तिक मास्टर ने गुरुवार को जदयू प्रत्याशी वाल्मीकि सिंह को भारी अंतर से हराकर चुनाव जीत लिया। कार्तिक मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के काफी करीबी बताए जाते हैं। वह फिलहाल आर्म्स एक्ट के तहत पटना की बेउर जेल में बंद है। कार्ति भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं। पटना को भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है, जिसमें दो सांसद रविशंकर प्रसाद और राम कृपाल यादव ने 2019 के लोकसभा चुनावों में क्रमश: पटना साहिब और पाटलिपुत्र निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की है। इसके अलावा, बिहार में एनडीए सरकार के कई विधायक और मंत्री पटना से हैं। पश्चिम चंपारण में राजद प्रत्याशी सौरभ चौधरी ने एमएलसी चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की है। पश्चिम चंपारण को भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है, जो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और उपमुख्यमंत्री रेणु देवी का गृह जिला है। उनसे अपने गृह जिले में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बारे में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को स्पष्टीकरण देने की उम्मीद है। पश्चिम चंपारण एमएलसी सीट पर 18 साल तक भाजपा का कब्जा रहा। सौरभ चौधरी भूमिहार जाति से हैं और इसे जीतने में कामयाब रहे। मुंगेर-जमुई-लखीसराय एमएलसी निर्वाचन क्षेत्र से राजद के एक अन्य उम्मीदवार अजय कुमार सिंह ने जद (यू) के उम्मीदवार संजय प्रसाद को हराया। सिंह भूमिहार समुदाय से हैं। राजद के अलावा अन्य जगहों पर भी भूमिहार जाति के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। बेगूसराय सीट से कांग्रेस पार्टी के राजीव सिंह ने जीत हासिल की। बेगूसराय को भाजपा का गढ़ माना जाता है और इसके तेजतर्रार नेता गिरिराज सिंह 2019 में वामपंथी दलों के कन्हैया कुमार को हराकर सांसद चुने गए थे। अब कन्हैया कुमार कांग्रेस के नेता हैं। सारण से निर्दलीय भूमिहार प्रत्याशी सच्चिदानंद राय ने भी जीत हासिल की। वह पहले भाजपा के नेता थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, इसलिए वह सारण से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़े। –आईएएनएस एसजीके/एएनएम

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