नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह के अंदर शिव मंदिर का दावा करने वाली हिन्दू सेना की याचिका पर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा है कि इस तरह के मामलों में कोई भी कोर्ट जा सकता है। लेकिन कोर्ट में सुनवाई और सबूत पेश करने के बाद ही फैसला लिया जा सकता है। देश में कोई भी सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए इस तरह की याचिका दाखिल कर सकता है।
“कब तक मस्जिद के भीतर शिव मंदिर ढूढ़ते रहोगे”
सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान का कि मोहन भागवत ने भी खुद कहा था कि कब तक मस्जिद के भीतर शिव मंदिर ढूढ़ते रहोगे। उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद में जो किया गया, उसका क्या परिणाम हुआ? वहां चार लोगों की मौत हो गई। दो घरों में तो कमाने वाले यही थे। लेकिन इसका उन लोगों को कोई भी मलाल नहीं है।
सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने निचली अदालत की ओर से पक्षकार न बनाए जाने पर कहा कि हमारे पास हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के वकीलों का एक पैनल हुआ है। हम लोग इनसे सलाह लेंगे कि हमें इस मामले में पक्षकार बनना चाहिए या सिर्फ इंतजार करना चाहिए, इस सवाल के जवाब पर हम अमल करेंगे।
मोहन भागवत की तरफ से भी पेश की जाती है चादर
सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह में देश के प्रधानमंत्री 1947 से चादर भेज रहे हैं। यहां भारत के कई राज्यों के सीएम, राज्यपाल और RSS प्रमुख की तरफ से चादर चढ़ाई गई है। इसके अलावा राजनीतिक पार्टियों के प्रमुख भी यहां चादर भेजते हैं। यहां तक कि RSS प्रमुख मोहन भागवत की तरफ से भी अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाई जाती है।
सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि अजमेर में जितनी हिन्दू आबादी है, उन्हें दरगाह पर बड़ी आस्था है। हिन्दू महिलाएं अपने बच्चों को अजमेर शरीफ दरगाह के बाहर लेकर खड़ी रहती हैं और मस्जिद से नमाज पढ़कर आने वालों से अपने बच्चे पर फूंक मरवाकर, अपने बच्चे की बीमारी को ठीक करने की उम्मीद लगाए रहती हैं।




