नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । रामनगरी अयोध्या से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माने जाने वाले प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के प्रसाद में मिलावट की पुष्टि हुई है। फूड सेफ्टी विभाग द्वारा लिए गए तीन नमूनों में से दो फेल पाए गए, जिससे न केवल भक्तों की आस्था को आघात पहुंचा है, बल्कि प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जांच में बेसन के लड्डू और देसी घी शुद्ध नहीं मिले
हनुमानगढ़ी मंदिर में परंपरागत रूप से बजरंगबली को बेसन के लड्डू और देसी घी का भोग अर्पित किया जाता है। हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मंदिर परिसर से प्रसाद के तीन नमूने लिए थे, जिनमें से दो मानकों पर खरे नहीं उतरे। लड्डू और घी में मिलावट की पुष्टि होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
पहले ही दी गई थी चेतावनी, फिर भी लापरवाही
मंदिर के महंत संजय दास महाराज ने पूर्व में प्रसाद विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि लड्डू उच्च गुणवत्ता वाले बेसन और शुद्ध देसी घी से ही बनाए जाएं। यहां तक कि कीमत भी ₹450 से ₹500 प्रति किलो तय की गई थी। बावजूद इसके, मिलावटी प्रसाद की पुष्टि होना चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
पनीर का नमूना भी फेल, पूरे अयोध्या में फैली चिंता
इसी क्रम में अयोध्या धाम की एक दुकान से लिया गया पनीर का नमूना भी जांच में फेल पाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या श्रद्धालुओं की आस्था और स्वास्थ्य दोनों ही प्रशासन की प्राथमिकता से बाहर हो गए हैं?
हनुमानगढ़ी का महत्व और श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट
अयोध्या में यह मान्यता है कि रामलला के दर्शन से पहले हनुमानगढ़ी जाकर बजरंगबली की अनुमति लेना आवश्यक है। यह मंदिर भक्तों की पहली आस्था का केंद्र है। ऐसे में यहां के प्रसाद में मिलावट मिलना न केवल धार्मिक भावना पर चोट है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि श्रद्धालु किस पर भरोसा करें?
फूड सेफ्टी विभाग की चेतावनी होगी सख्त कार्रवाई
खाद्य उपायुक्त मानिक चंद्र सिंह ने कहा है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आगे और मंदिर परिसरों व दुकानों से भी नमूने लिए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं को शुद्ध और सुरक्षित प्रसाद सुनिश्चित किया जा सके, श्रद्धालुओं को प्रसाद की गुणवत्ता की जानकारी देने की व्यवस्था की जाए।
प्रशासन पर उठे सवाल श्रद्धा या व्यवस्था?
प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। क्या केवल दर तय कर देने या चेतावनी देने भर से मिलावट पर लगाम लगाई जा सकती है? श्रद्धालुओं की सेहत और आस्था दोनों से समझौता आखिर कब तक?





