नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी के मौके पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के आदेश को लेकर AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कदम को संवेदनहीन और असंवैधानिक बताते हुए नगर निगमों से आदेश वापस लेने की मांग की है।
GHMC का आदेश
ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) ने 15 अगस्त और जन्माष्टमी पर शहर की सभी मांस की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने का आदेश जारी किया है। यह आदेश GHMC अधिनियम, 1955 की धारा 533 (B) के तहत जारी हुआ है। आदेश हैदराबाद, साइबराबाद और राचकोंडा के पुलिस आयुक्तों को भी भेजा गया है। सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों, जोनल कमिश्नरों और विभागीय निदेशकों को इसका सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
ओवैसी की प्रतिक्रिया
ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया मांस खाने और स्वतंत्रता दिवस मनाने के बीच क्या संबंध है? तेलंगाना के 99% लोग मांस खाते हैं। यह प्रतिबंध लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के कई नगर निगमों ने 15 अगस्त को मांस बिक्री पर रोक लगाकर लोगों की व्यक्तिगत पसंद और संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप किया है।
मुंबई में भी विरोध
मुंबई नगर निगम ने भी इसी तरह का आदेश जारी किया है, जिस पर विपक्षी दलों ने नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि ऐसे प्रतिबंध लोगों की निजी पसंद पर थोपे नहीं जाने चाहिए। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस तरह के प्रतिबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे परंपरा और धार्मिक भावनाओं से जोड़कर सही ठहरा रहा है, जबकि दूसरा इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल मान रहा है। तो वहीं शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि केडीएमसी आयुक्त को निलंबित किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि शाकाहारी या मांसाहारी खाने का फैसला हर व्यक्ति की अपनी इच्छा है NCP नेता जितेंद्र अवस्थाद ने भी कहा कि वे केडीएमसी के इस प्रतिबंध के विरोध में स्वतंत्रता दिवस पर मांसाहारी भोजन करेंगे।




