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Wednesday, March 4, 2026
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Delhi Liquor Scam: आबकारी नीति मामले में क्यों हुई केजरीवाल और उनके साथियों की गिरफ्तारी, क्या है पूरा मामला?

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भूयन ने फैसला सुनाया है। केजरीवाल ने CBI की ओर से की गई उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत से राहत की मांग की है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिल्ली आबकारी नीति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले पर 10 सितंबर को सुनवाई होगी। आखिर क्या है पूरा मामला और कौन-कौन इस मामले से जुड़ा हुआ है और इस केस को लेकर वर्तमान में क्या डेवेलपमेंट हुए हैं। इन सब बातों को जानने के लिए पढ़ें यह विशेष रिपोर्ट।

क्या थी नई आबकारी नीति

दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति 2021-22 लेकर आई थी। इस नीति के तहत शराब खरीदने का नया अनुभव लोगों को देना चाहती थी। नई नीति के अनुसार होटलों के बार, क्‍लब्‍स और रेस्‍टोरेंट्स को रात 3 बजे तक ओपन रखने की छूट दी गई थी। इसमें छत समेत खुली जगह पर भी शराब परोसने की इजाजत दी गई थी। इससे पहले तक, खुले में शराब परोसने का अनुमति नहीं थी। बार में किसी भी तरह के मनोरंजन का इंतजाम करने का भी प्रावधान था। इसके अलावा बार काउंटर पर खुल चुकीं बोतलों की शेल्‍फ लाइफ पर वापस रखने पर कोई रोक नहीं रखी गई थी। नई पॉलिसी के तहत किसी भी शराब की दुकान पर सरकार का मालिकाना हक नहीं रखने का प्रावधान था। नई पॉलिसी में कंज्‍यूमर की चॉइस और ब्रैंड्स की उपलब्‍धता को तवज्जो दी गई थी। इसका उद्देश्य स्‍मगलिंग और बूटलेगिंग रोकना था। नई पॉलिसी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि ई-टेंडरिंग के जरिए हर जोन ऑपरेटर के लिए नया L-7Z लाइसेंस दिया जाए।

नई नीति दिल्ली को 32 जोन में बांटती थी

नई नीति दिल्ली को 32 जोन में बांटती थी। इसके अनुसार मार्केट में केवल 16 प्लेयर्स को इजाजत दी जा सकती है। इससे एकाधिकार मिलने की बात थी। विपक्षी दलों का आरोप था कि नई आबकारी नीति से केजरीवाल सरकार ने करोड़ों रुपये का भ्रष्‍टाचार किया।

दिल्‍ली में शराब के कई छोटे दुकादार अपनी दुकानें बंद कर चुके थे। उनका कहना था कि कुछ बड़े प्‍लेयर्स अपने यहां स्‍टोर्स पर भारी डिस्‍काउंट से लेकर ऑफर्स दे रहे हैं। ऐसे में इससे उनके लिए बिजनेस कर पाना ना के बराबर हो गया था। नई पॉलिसी को कोर्ट में भी चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि नई पॉलिसी अवैध, अनुचित, मनमानी है। यह दिल्ली आबकारी अधिनियम-2009 का उल्लंघन करती है। साथ ही दिल्ली सरकार के 28 जून के ई-टेंडर नोटिस को भी रद्द करने की मांग की गई थी। इसमें शराब के रिटेल विक्रेताओं को 32 जोनल लाइसेंस देने के लिए जोन वाइज इलेक्ट्रॉनिक बोलियां मंगाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तय की गई थी।

वहीं, बीजेपी का कहना था कि टेंडर की शर्तों के हिसाब से कॉर्टल यानी दो-तीन कंपनियों को एक करने की परमिशन नहीं थी। बीजेपी का आरोप था कि दस्तावेज के मुताबिक कार्टल हुआ है। टेंडर के हिसाब से ब्लैक लिस्टेड कंपनी को अनुमति नहीं थी, लेकिन दिल्ली में एक कंपनी को दो जोन डिस्ट्रीब्यूशन के लिए दिए गए। तीसरा रिटेल सेक्टर में मैन्युफेक्चरिंग कंपनी को परमिशन नहीं थी। मगर, इन निर्माता कंपनियों को दो जोन दिए। इसके दस्तावेज आबकारी विभाग को भी दिए थे।

केजरीवाल की सरकार पर क्या लगे थे आरोप 

दिल्ली सरकार पर आरोप था कि दिल्ली सरकार ने कैबिनेट को भरोसे में लिए बिना तमाम नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर कई निर्णय लिए। यहां तक कि कैबिनेट से यह निर्णय भी पास करवा लिया गया कि अगर पॉलिसी को लागू करने के दौरान उसके मूलभूत ढांचे में कुछ बदलाव करने की जरूरत हो तो आबकारी मंत्री ही वो बदलाव कर सकें।

हालांकि, तत्कालीन एलजी ने कैबिनेट के इस फैसले पर सवाल उठाए थे। इसके बाद 21 मई को हुई कैबिनेट मीटिंग में यह निर्णय वापस ले लिया गया। लेकिन इसके बावजूद एक्साइज विभाग मनमाने तरीके से लिए गए फैसलों को लागू करता रहा। इस मामले में मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन को भी गिरफ्तार किया किया था। बहुत प्रयासों के बाद मनीष को हाल ही में बेल मिली है और वो जेल से बाहर हैं।

साउथ के नेता भी हैं शामिल 

हैदराबाद के कारोबारी अरुण रामचंद्र पिल्लई का नाम अगस्त 2022 में दर्ज एफआईआर में मनीष सिसोदिया सहित सीबीआई की 15 आरोपियों की सूची में शामिल है। अरुण को मार्च 2023 में ईडी ने दिल्ली शराब नीति मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। अरुण कथित रूप से साउथ लॉबी का हिस्सा थे। उन पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने 100 करोड़ रुपये की किकबैक नेताओं को भेजा था। 

उनपर मनी लॉन्ड्रिंग के साथ दिल्ली में शराब लाइसेंस के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देने का भी आरोप लगाया गया है। ईडी के अनुसार, शराब बनाने वाली कंपनी इंडोस्पिरिट में अरुण पिल्लई के 32.5 प्रतिशत शेयर थे। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने जून में अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया था। 

इस मामले में भारत राष्ट्र समिति की नेता के. कविता भी शामिल रहीं। इन्हें बहुत समय तक ईडी की हिरासत में रख गया। कोर्ट ने शनिवार को दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपी के. कविता की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हिरासत 26 मार्च तक बढ़ा दी थी। ईडी ने आरोप लगाया है कि कविता साउथ ग्रुप का हिस्सा थीं। जिसने 2021-22 के लिए आबकारी नीति के तहत शराब कारोबार के लाइसेंस के एवज में दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) को 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। हालांकि अब यह नीति रद्द हो चुकी है। 

केजरीवाल की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और अब इस मामले में मंगलवार को फिर से सुनवाई की जाएगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भूयन ने फैसला सुनाया है। केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से की गई उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत से राहत की मांग की है।

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