नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। अरविंद केजरीवाल कोर्ट से बाहर आ गए हैं। वो तिहाड़ जेल के गेट नंबर 3 से बाहर आए। उन्हें जेल से लेने के लिए आप पार्टी के नेता बड़ी संख्या में वहां पर पहुंचे हुए हैं । केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी जेल के बाहर मौजूद हैं। दरअसल केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने आज जमानत दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
दिल्ली आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के मामले में SC ने अरविंद केजरीवाल को जमानत दी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल की बेंच ने जमानत वाले मामले में एकमुश्त फैसला देकर अरविंद केजरीवाल की जमानत पर मुहर लगा दी है। हालांकि SC ने उन पर कुछ पाबंदिया भी लगाई है जिसके तहत वह मामले के गवाहों से नही मिल सकते और कोई भी फाइल साइन नहीं कर सकेंगे। हालांकि CBI द्वारा अवैध गिरफ्तारी के मामले में दोनों जस्टिस की अलग अलग राय सामने आई है। जस्टिस सूर्यकांत ने गिरफ्तारी को वैध माना जबकि जस्टिस उज्जवल भुइयां ने गिरफ्तारी को लेकर संशय जाहिर किया।
क्या थी नई आबकारी नीति
दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति 2021-22 लेकर आई थी। इस नीति के तहत शराब खरीदने का नया अनुभव लोगों को देना चाहती थी। नई नीति के अनुसार होटलों के बार, क्लब्स और रेस्टोरेंट्स को रात 3 बजे तक ओपन रखने की छूट दी गई थी। इसमें छत समेत खुली जगह पर भी शराब परोसने की इजाजत दी गई थी। इससे पहले तक, खुले में शराब परोसने का अनुमति नहीं थी। बार में किसी भी तरह के मनोरंजन का इंतजाम करने का भी प्रावधान था। इसके अलावा बार काउंटर पर खुल चुकीं बोतलों की शेल्फ लाइफ पर वापस रखने पर कोई रोक नहीं रखी गई थी। नई पॉलिसी के तहत किसी भी शराब की दुकान पर सरकार का मालिकाना हक नहीं रखने का प्रावधान था। नई पॉलिसी में कंज्यूमर की चॉइस और ब्रैंड्स की उपलब्धता को तवज्जो दी गई थी। इसका उद्देश्य स्मगलिंग और बूटलेगिंग रोकना था। नई पॉलिसी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि ई-टेंडरिंग के जरिए हर जोन ऑपरेटर के लिए नया L-7Z लाइसेंस दिया जाए।
नई नीति दिल्ली को 32 जोन में बांटती थी
नई नीति दिल्ली को 32 जोन में बांटती थी। इसके अनुसार मार्केट में केवल 16 प्लेयर्स को इजाजत दी जा सकती है। इससे एकाधिकार मिलने की बात थी। विपक्षी दलों का आरोप था कि नई आबकारी नीति से केजरीवाल सरकार ने करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया।
दिल्ली में शराब के कई छोटे दुकादार अपनी दुकानें बंद कर चुके थे। उनका कहना था कि कुछ बड़े प्लेयर्स अपने यहां स्टोर्स पर भारी डिस्काउंट से लेकर ऑफर्स दे रहे हैं। ऐसे में इससे उनके लिए बिजनेस कर पाना ना के बराबर हो गया था। नई पॉलिसी को कोर्ट में भी चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि नई पॉलिसी अवैध, अनुचित, मनमानी है। यह दिल्ली आबकारी अधिनियम-2009 का उल्लंघन करती है। साथ ही दिल्ली सरकार के 28 जून के ई-टेंडर नोटिस को भी रद्द करने की मांग की गई थी। इसमें शराब के रिटेल विक्रेताओं को 32 जोनल लाइसेंस देने के लिए जोन वाइज इलेक्ट्रॉनिक बोलियां मंगाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तय की गई थी।




