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विश्वविद्यालयों में फिजिकल, मेंटल हेल्थ काउंसलर और हेल्थ एक्सपर्ट की नियुक्ति होगी अनिवार्य

नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। देश भर के विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में स्पोर्ट्स एक अनिवार्य विषय बनने जा रहा है। इस नई पहल के अंतर्गत विश्वविद्यालयों के छात्रों को स्पोर्ट्स एवं संबंधित गतिविधियों से सीधे जोड़ा जाएगा। उच्च शिक्षा में होने जा रहे नए बदलावों के अंतर्गत देश के उच्च शिक्षण संस्थान फिजिकल, मेंटल हेल्थ काउंसलर और हेल्थ एक्सपर्ट की भी नियुक्ति करेंगे। उच्च शिक्षण संस्थानों में यह नियुक्तियां करना अनिवार्य होगा। दरअसल उच्च शिक्षण संस्थानों में यह बदलाव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी द्वारा लिए गए निर्णय के आधार पर किए जा रहे हैं। यूजीसी के मुताबिक उच्च शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य तौर पर छात्रों के शारीरिक, मानसिक फिटनेस और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के आधार पर यूजीसी की उच्च स्तरीय कमेटी ने इन विषयों को लेकर के एक विशेष गाइडलाइन तैयार की है। यूजीसी द्वारा बनाई गई गाइडलाइन के मुताबिक विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों की फिजिकल फिटनेस, स्पोर्ट्स, स्टूडेंट हेल्थ, वेलफेयर, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान भी रखना होगा। देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बनाई गई यह गाइडलाइन यूजीसी इसी सप्ताह जारी करने जा रहा है। यूजीसी द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाने के उपरांत उच्च शिक्षण संस्थानों को इसी शैक्षणिक सत्र से स्पोर्ट्स को एक अनिवार्य विषय के रूप में लागू करना होगा। इस विषय में दिशानिर्देश बनाने वाली यूजीसी की कमेटी का मानना है कि कोरोना महामारी के दौरान जहां शारीरिक और मानसिक फिटनेस पर ध्यान दिया जा रहा था वही भावनात्मक पहलुओं की जरूरत को भी नोटिस किया गया। गौरतलब है कि उच्च शिक्षा में किए जा रहे इस नए बदलाव के अंतर्गत कॉलेजों में स्टूडेंट सर्विस सेंटर बनाए जाने का प्रस्ताव है। विश्वविद्यालयों को शारीरिक शिक्षण को गंभीरता से लेना होगा और इसके लिए निदेशक स्तर के अधिकारी की तैनाती की जाएगी। कॉलेज और विश्वविद्यालय के कैंपस में पैदल चलने के लिए ट्रैक बनाने होंगे। देश में कई जगह स्कूल स्तर पर स्पोर्ट्स एक अनिवार्य विषय के रूप में जाता है, हालांकि उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसा नहीं है। उच्च शिक्षण संस्थानों में स्पोर्ट्स अभी भी एक विकल्प के तौर पर ही है। इसलिए अब यूजीसी खेल को एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करना चाहती है, जिससे कि शारीरिक गतिविधि के साथ-साथ छात्रों का मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य उच्चतम बना रहे। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शिक्षण संस्थानों में खेल को महत्व देने के लिए कई नई योजनाएं भी शुरू की है। देश के हिमालयी क्षेत्र में विभिन्न श्रेणियों में 506.13 करोड़ रुपये के बराबर की 77 खेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन मंजूरियों के साथ ही हिमालयी क्षेत्र में खेलो इंडिया स्कीम के तहत 24 खेल अकादमियों को भी मान्यता दी गई है और 199 खेलो इंडिया केंद्रों (जिला स्तर) तथा 11 खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्रों को अनुमोदित किया गया है। हिमालयी क्षेत्र सहित देश में खेल भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय खेलों के व्यापक आधार को बढ़ाने तथा खेलों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई योजनाओं को कार्यान्वित कर रहा है। यहां 77 खेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। –आईएएनएस जीसीबी/एएनएम

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