नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने अब तक की अपनी जांच में पाया है कि आतंकी पहलगाम की बैसरन घाटी में पहले से ही ठहरे हुए थे। इतना ही नहीं इन आतंकियों ने तीन अन्य जगहों की भी रेकी की थी। बैसरन घाटी के अलावा इन लोगों ने अरु घाटी, एम्यूजमेंट पार्क और बेताब घाटी की रेकी की थी। इन जगहों पर बड़ी संख्या में पर्यटक भी मौजूद रहते हैं। NIA द्वारा की गई शुरुआती जांच में पता चला है कि आतंकियों ने इन तीनों जगहों की रेकी की थी, लेकिन हमला नहीं किया। इसकी वजह यह थी कि इन तीनों जगहों पर सुरक्षा बलों की संख्या ज्यादा थी। ऐसे में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के चलते आतंकियों ने हमले के लिए बैसरन घाटी को चुना।
ओवर ग्राउंड वर्कर का मिला साथ
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि 22 अप्रैल को बैसरन घाटी में हुए हमले से 2 दिन पहले आतंकी वहां मौजूद थे। इस भीषण आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। आतंकियों ने पहलगाम में मौजूद लोगों से उनका धर्म पूछा और जब इन लोगों ने बताया कि वे हिंदू हैं तो उन्होंने उन्हें गोली मार दी। इस आतंकी हमले में ओवरग्राउंड वर्करों का भी साथ होने का संकेत मिला है।
OGW करते थे रेकी
ओवर ग्राउंड वर्कर (over ground worker) आतंकी और उनके समर्थक होते हैं जो समाज में आम लोगों की तरह रहते हैं। लेकिन ऐसे लोग आतंकियों की मदद करते हैं या उन्हें रहने के लिए जगह आदि मुहैया कराते हैं। NIA की जांच में पता चला है कि ऐसे 4 ओवरग्राउंड वर्करों ने पहलगाम समेत 4 जगहों पर हमले के लिए रेकी की थी। इस रेकी के बाद ही आतंकियों ने हमला करने की जगह पहलगाम की बैसरन घाटी को चुना। जहां सैकड़ो लोग मौजूद थे।
पूछताछ के लिए सैकड़ो लोग हिरासत में
सूत्र बताते हैं कि, अब तक कुल 20 ओवरग्राउंड वर्करों की पहचान हो चुकी है। इनमें से कई लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इस हमले के बाद अब तक 186 लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा चुकी है। दरअसल, कश्मीर में आतंकी संगठनों की लंबे समय से यही रणनीति रही है। अब कोई भी खुलकर आतंकी संगठनों का समर्थन नहीं करता, लेकिन कई लोग अपने काम और कारोबार के दौरान आतंकियों का समर्थन करते नजर आते हैं। इन्हें ओवरग्राउंड वर्कर कहा जाता है।
आपको बता दें कि, 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी। इन आतंकियों ने सिर्फ पुरुषों को मारा और महिलाओं को छोड़ दिया। इन महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि आतंकियों ने पहले उनसे उनका धर्म पूछा और फिर उनसे कलमा पढ़ने को कहा। जब यह पुष्टि हो गई कि वे मुसलमान नहीं हैं तो उन्हें बेरहमी से मार दिया गया।





