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Monday, March 16, 2026
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अल्मोड़ा के इन गांवो का तुगलकी फरमान, कहा- बिना पुलिस सत्यापन के गांव में घुसने नहीं देंगे, जानिए पूरा मामला

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 1 अक्टूबर 2024 को अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे विकासखंड की भाकुड़ा गांव की प्रधान हेमा देवी ने अपने गांव के लोगों के साथ बैठक की।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में आने वाले कुछ गांवों के लोगों ने फैसला लिया है कि उनके गांवों में बिना पुलिस सत्यापन के कोई भी अंजान व्यक्ति प्रवेश नहीं करेगा। अगर कोई भी बाहरी व्यक्ति गांव में आएगा तो उसको ग्रामसभा को पुलिस सत्यापन के दस्तावेज दिखाने होंगे। अगर बाहरी व्यक्ति के पास पुलिस सत्यापन के दस्तावेज नहीं मिले, तो उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह आदेश गांवो के प्रधानों ने गांव के लोगों की सहमति के बाद ही जारी किए हैं। बता दें कि यह कोई सरकारी आदेश नहीं हैं, बल्कि गांवो के लोगों ने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। इन गांवों के लोगों ने अपने गांव के प्रवेश द्वार पर नोटिस बोर्ड भी लगाया हुआ है।

इन गांवो में पुलिस सत्यापन के बिना जाने की अनुमति नहीं 

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे विकासखंड की भाकुड़ा ग्रामसभा, अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड के गांव कालीगड़ और लमगड़ा विकासखंड के ऐंचोली गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश में रोक लगाई गई है। केवल पुलिस सत्यापन के दस्तावेज दिखाने के बाद ही बाहरी लोग इन गांवों में प्रवेश कर पाएंगे। अधिकतर फेरी वाले बाहरी लोग व्यापार के सिलसिले में गांव में प्रवेश कर जाते हैं। गांव में कई बार ऐसी भी घटना सामने आई हैं, जिसमे फेरी वालों ने उन्हें ठगने का काम भी किया है और अपराधिक घटनाओं को भी अंजाम दिया है। इसके अलावा गांववालों ने यह फैसला पहाड़ों में भूमाफिया की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भी लिया है।

अनुमति के बिना गांव में प्रवेश करने पर भारी जुर्माना 

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 1 अक्टूबर 2024 को अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे विकासखंड की भाकुड़ा गांव की प्रधान हेमा देवी ने अपने गांव के लोगों के साथ बैठक की। इस बैठक में गांव की प्रधान हेमा देवी ने गांव के लोगों की सहमति के बाद फैसला लिया कि जो भी अनजान व्यक्ति गांव में बिना पुलिस सत्यापन के प्रवेश करेगा उसपर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इससे पहले लमगड़ा विकासखंड के ऐंचोली गांव और सल्ट विकासखंड के गांव कालीगड़ ने भी इस तरह का फैसला लिया था।

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