नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के विधायक मुर्शीद आलम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु बताया है। मुर्शीद आलम ने बताया कि 2014 में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू में राजनीति में शामिल कराया था और उन्होंने अपनी सियासी उन्नति में मुख्यमंत्री का योगदान कभी नहीं भुलाया। जोकीहाट सीट से चुने गए इस विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने क्षेत्र के लिए दो नए महाविद्यालय और एक अतिरिक्त अंचल की मांग भी रखी।
सियासी अर्थ और संभावनाएं
मुर्शीद आलम की तारीफ और निकटता के बाद सियासत में अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या AIMIM के विधायक जेडीयू के साथ फिर से किसी तरह के राजनीतिक समीकरण में शामिल हो सकते हैं। हालांकि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मुलाकात को केवल सीमांचल के मुद्दों तक सीमित बताते हुए कहा कि कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकालना चाहिए। बावजूद इसके, पिछले चुनावों में AIMIM के कई विधायक जेडीयू या आरजेडी में शामिल हो चुके हैं, जिससे बिहार की राजनीति में संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा बनी हुई है।
जेडीयू और बीजेपी का परिदृश्य
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जेडीयू ने 85 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही, जबकि सहयोगी बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या AIMIM के विधायकों को जेडीयू में शामिल कर अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
AIMIM के साथ सियासी समीकरण पर सवाल
बिहार में मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र से चुने गए AIMIM के पांचों विधायक – मुर्शीद आलम, अख्तरुल ईमान, गुलाम सर्वर, सरवर आलम और मोहम्मद तौसीफ आलम – की नीतीश कुमार के साथ बढ़ती नजदीकियां राजनीतिक समीकरण बदल सकती हैं। ऐसे में सियासी माहौल में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या फिर AIMIM और जेडीयू के बीच कोई नया ‘खेला’ सामने आएगा।




