नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के मात्र 32 सेकंड बाद ही दोनों इंजन बंद हो गए, जिससे विमान संतुलन खो बैठा और रनवे से 0.9 नॉटिकल मील दूर जाकर एक हॉस्टल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
जांच में क्या सामने आया?
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की 15 पेज की प्राथमिक रिपोर्ट में हादसे की मुख्य वजहें और पायलटों की आखिरी बातचीत सामने आई है। उड़ान के 3 सेकंड बाद विमान ने 180 नॉट की अधिकतम गति हासिल की। उसी समय इंजन 1 और इंजन 2 के फ्यूल कंट्रोल स्विच क्रमशः CUTOFF मोड में चले गए। कॉकपिट रिकॉर्डिंग में एक पायलट ने दूसरे से पूछा, “आपने कटऑफ क्यों किया?” जवाब आया, “मैंने नहीं किया। इसके बाद दोनों इंजनों को दोबारा चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन इंजन 2 पूरी तरह से सक्रिय नहीं हो सका। 08:09:05 UTC पर पायलट ने “मेडे, मेडे, मेडे” का संदेश भेजा।
तकनीकी पहलू और ब्लैक बॉक्स की जानकारी
इंजन बंद होते ही RAT (रैम एयर टर्बाइन) सक्रिय हो गया, जो कि बिजली के पूरी तरह कटने का संकेत है। ब्लैक बॉक्स से पता चला कि थ्रस्ट लीवर निष्क्रिय थे लेकिन टेकऑफ थ्रस्ट सक्रिय था, जो कंट्रोल फेलियर की ओर इशारा करता है। ईंधन की गुणवत्ता जांच में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। आसमान साफ, हल्की हवा और अच्छी विजिबिलिटी थी। पक्षियों की कोई गतिविधि नहीं देखी गई। विमान में कोई खतरनाक सामग्री नहीं थी और वजन-संतुलन पूरी तरह सामान्य था।
एयर इंडिया का बयान
दोनों पायलट अनुभवी, स्वस्थ और पूरी तरह से आराम कर चुके थे। उनकी उड़ान के लिए पूरी पात्रता थी। रिपोर्ट में किसी साजिश या तोड़फोड़ के प्रमाण नहीं मिले। हालांकि FAA (अमेरिकी विमानन संस्था) ने ईंधन कंट्रोल स्विच से जुड़ी एक संभावित तकनीकी खराबी की चेतावनी पहले ही दी थी, लेकिन एयर इंडिया ने उस पर कोई जांच नहीं कराई थी। रिपोर्ट जारी होने के बाद एयर इंडिया ने कहा कि वे AAIB और अन्य नियामक एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। एयरलाइन ने सभी प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि वे इस कठिन समय में हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, एयर इंडिया ने जांच पूरी होने तक रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। यह हादसा कई तकनीकी और संभावित सिस्टम फेलियर की ओर इशारा करता है। एयर इंडिया और जांच एजेंसियों के लिए यह एक चेतावनी है कि FAA की सलाहों को गंभीरता से लिया जाए और तकनीकी निरीक्षण में कोई लापरवाही न बरती जाए।




