नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। रविवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद वहां अगले मुख्यमंत्री को लेकर हलचल होने लगी थी। हालांकि 13 फरवरी को देर शाम वहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी की शाम को दिल्ली से वापस लौटते ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
विपक्ष ने की थी राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
यह बात जगजाहिर है कि मणिपुर में मैती और कुकी समुदाय के बीच लंबे समय से हिंसा का दौर चल रहा है। हालात यह हो गए थे कि वहां सीआरपीएफ की तैनाती करनी पड़ी। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने मांग की थी कि दोनों समुदाय के लोगों को आमने-सामने बैठ कर परिस्थितियों को सामान्य किया जाए और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। हालांकि 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति लागू करने की घोषणा कर दी है। हालांक विपक्ष के अलावा बीजेपी के विधायकों में भी सरकार को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा था। जानकारी के मुताबिक ऐसा माना जा रहा था कि बीजेपी के विधायकों ने इसकी शिकायत दिल्ली में आलाकमान को भी चिट्ठी के जरिए की थी।
9 फरवरी को दिल्ली से लौटते ही इस्तीफा दिया
रविवार को शाम साढ़े 6 बजे के करीब मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करके मणिपुर लौटे थे। उन दौरान उनके साथ पुरी सासंद संबित पात्रा भी थे। बीरेन सिंह ने राज्यपाल भवन से समय लेकर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर अपनी इस्तीफा सौंप दिया था। जिसके अगले ही दिन से मणिपुर विधानसभा के सत्र की शुरुआत होनी थी। ऐसे 5वे दिन केंद्र सरकार ने वहां राष्ट्रपति शासन लागू करने की घोषणा कर दी है।




