नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बिहार की राजधानी पटना में दिनदहाड़े गैंगवार की घटना ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए है। बीते दिन पटना के निजी पारस अस्पताल में बैखौफ 5 हमलावरों ने अस्पताल में घुसकर वॉर्ड के अंदर जिस तरह से चंदन मिश्रा को गोलियों से भून डाला, उसके बाद से पटना पुलिस पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। मामले में पुलिस गहनता से जांच कर रही है। घटना के करीब 36 घंटे बीते जाने के बाद भी अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
पटना के पारस हॉस्पिटल में चंदन मिश्रा हत्याकांड के पीछे प्रतिद्वंदी गैंग के सदस्यों का हाथ बताया जा रहा है जिसके सरगना कुख्यात अपराधी शेरू सिंह नाम लिया जा रहा है। इस हत्याकांड में शेरु सिंह का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। अब शेरू सिंह ने पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को धमकी भरा फोन करवाया। ऐसा दावा पप्पू यादव ने खुद मीडिया के सामने किया। पप्पू यादव ने कहा कि उन्हें इस मामले से दूर रहने की धमकी भी दी गई है।
‘हमको फोन करवाया’
मामले में सांसद पप्पू यादव ने मीडिया से बातचीत में बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि चंदन मिश्रा की हत्या के कुछ समय बाद ही उन्हें एक फोन आया, जो कथित तौर पर कुख्यात अपराधी शेरू सिंह की ओर से कराया गया था। पप्पू यादव के अनुसार, कॉल करने वाले व्यक्ति ने साफ कहा, ‘ये जो आरा का शेरुआ है, जो मर्डर करवाया हमको फोन करवाया है। पप्पू यादव को कह दीजिए इस मर्डर में हाथ ना डाले।
कौन है शेरू सिंह और क्या है उसका कनेक्शन
चंदन मिश्रा के मर्डर के तार जिस शेरू सिंह से जुड़ रहे हैं, वह बिहार के कुख्ताय आपराधियों में से एक है। मिली जानकारी के मुताबिक, चंदन और शेरू पहले एक ही गैंग में काम करते थे और 2011 में दोनों ने मिलकर बक्सर के एक चूना व्यवसायी की हत्या की थी। इस मामले में दन को उम्रकैद की सजा हुई और वह जेल में बंद रहा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदन और शेरू दोनों एक समय भागलपुर जेल में बंद थे। वहीं, से उनके संबंधों में खटास आई और गैंग के भीतर वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। इसी का नतीजा चंदन की हत्या के रूप में सामने आया।
हत्या की साजिश पहले से थी तैयार
पारस अस्पताल में हुई सनसनीखेज वारदात में गहनता से जांच कर रही पटना पुलिस की ओर से कहा गया कि, चंदन मिश्रा की हत्या किसी तात्कालिक गुस्से या मौके की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह एक प्लान के तहत की गई वारदात है। चंदन मिश्रा की पैरोल खत्म होने ही वाली थी, लेकिन इससे पहले 17 जुलाई की सुबह ही हमलावरों ने अस्पताल में घुसकर उसकी हत्या कर दी। ऐसे में पुलिस को शक है कि अपराधियों को अस्पताल की हर गतिविधि और लोकेशन की सटीक जानकारी पहले से थी।
तौसीफ बादशाह ने रची पूरी साजिश
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस शूटआउट की कमान एक और कुख्यात बदमाश तौसीफ बादशाह के हाथ में थी, जो पहले भी कई गंभीर मामलों में वांछित रह चुका है। वारदात के दिन 2 बाइक पर सवार अपराधी अस्पताल पहुंचे। इनमें से पांच सीधे अस्पताल की बिल्डिंग में दाखिल हुए और वार्ड में पहुंचकर ताबड़तोड़ फायरिंग की।
वारदात के बाद पुलिस पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद पटना पुलिस मामले में गहराई से जांच कर रही है। लेकिन पुलिस की जांच में अभी तक कोई ठोस गिरफ्तारी नहीं हुई है। आरोपियों की तलाश में कई जगह छापेमारी की जा रही है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता फरार हैं। 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।





