नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका लगा है। 8 अक्टूबर 2024 की सुबह चुनाव आयोग जब वोटों की काउंटिंग शुरू कर रहा था, तो शुरुआती रुझानों में कांग्रेस ने बढ़त बना ली थी। जिससे कांग्रेस में काफी खुशी का माहौल था। लेकिन फिर चुनाव आयोग के रुझानों में बीजेपी ने बढ़त बना ली थी और शाम तक बीजेपी ने हरियाणा की 48 विधानसभा सीटों में जीत दर्ज कर ली और कांग्रेस केवल 37 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई। हरियाणा में सरकार बनाने के लिए 46 विधानसभा सीटों की जरूरत होती है, जिसकों बीजेपी ने आसानी से हासिल कर लिया है। कांग्रेस को हरियाणा में मिली बुरी हार के बाद उसके सहयोगी दलों ने उसपर तंज कसने और नसीहत देना शुरू कर दिया है।
सीटों के बंटवारे को लेकर उसके सहयोगी दल सलाह देने लगे हैं
अब कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर उसके सहयोगी दल के नेता सलाह देने लगे हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने तो कांग्रेस को यहां तक कह डाला है कि आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर उद्धव ठाकरे को आगे लेकर चलना पड़ेगा। तभी हम बीजेपी और उसके सहयोगी पार्टियों का मुकाबला कर पाएंगे।
कांग्रेस को पता है कि जीत को हार में कैसे बदलना है
वहीं शिवसेना ने अपने सामना अखबार के जरिए कांग्रेस पर बड़ा तंज कसा है। सामना में कहा गया है कि महाराष्ट्र कांग्रेस को भी हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिली हार से सीख लेने की जरूरत है। इसके साथ ही सामना में कहा गया कि कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर आप और अन्य दलों के साथ कोई गठबंधन नहीं किया, जिसके कारण उसे इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा है, जबकि कांग्रेस को जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन करने का फायदा मिला। इसके बाद सामना में कांग्रेस के लिए कहा गया कि उसको पता है कि जीत को हार में कैसे बदलना है।
हम इसको लेकर कांग्रेस से बात करेंगे की कहां गलतियां रह गयी
कांग्रेस की एक अन्य सहयोगी दल एनसीपी शरद पवार की नेता सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस को हरियाणा में मिली हार के बाद कहा कि सबको ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ। इसके बाद सुप्रिया सुले ने कहा कि हम इसको लेकर कांग्रेस से बात करेंगे की कहां गलतियां रह गयी ताकि फिर से उन गलतियों को न दोहराया जाए।
सपा ने भी कांग्रेस को अहमियत देनी कम कर दी है
कांग्रेस के सबसे बड़े सहयोगी दल समाजवादी पार्टी ने भी बिना कांग्रेस से बात किए उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव को लेकर अपने 6 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। एक समय ऐसा था, जब कांग्रेस और सपा ने लोकसभा चुनाव 2024 मिलकर लड़ा था और उत्तर प्रदेश में बहुत ही अच्छा प्रदर्शन करके दिखाया था। लेकिन अब हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद सपा ने भी कांग्रेस को अहमियत देनी कम कर दी है।
किसी भी चुनाव को हल्के में लेना ठीक नहीं होता- केजरीवाल
वहीं हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिली बुरी हार के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने भी कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा है कि किसी भी चुनाव को हल्के में लेना ठीक नहीं होता है। अत्यधिक आत्मविश्वास भारी पड़ सकता है।




