नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजनीति में इस समय जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद अचानक शशि थरूर का नाम आने लगा । केवल नाम के कांग्रेस नेता हो चुके केरल से सांसद शशि थरूर अपने व्यक्तित्व और शानदार इंग्लिश की जानकारी रखनेवाले सांसद शशि थरूर अपनी मशहूर किताबों और विदेश नीति की विशेषज्ञता के चलते भारतीय उच्च मध्यवर्ग के बीच काफी लोकप्रिय है। अब वहीं पीएम मोदी की कुछ मौके पर तारीफ करने के बाद से ही पार्टी से दूर होते गए थरूर अब उन्हें उनकी ही पार्टी में विशेष मौकों पर बुलाया नहीं जाता, जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद देश की राजनीति को बहुत नजदीक से जानने वाले चकित रह गए कि आखिर किस तरह शशि थरूर का उपराष्ट्रपति पद के लिए नाम सामने आ गया?
थरूर मोदी की विदेश नीति की तारीफ कई मंचों पर कर चुके है, कांग्रेस ने शायद मोदी सरकार के पक्ष में दिए गए उनके पूर्व के बयानों के आधार पर ही उनका नाम पार्टी की ओर से केंद्र सरकार को नहीं भेजा था। बीजेपी नेता अमित मालवीय, ने इसे कांग्रेस और राहुल गांधी की कमजोरी के रूप में प्रस्तुत किया। अब वहीं बीजेपी और भी मौकों पर विपक्ष को घेरने में इस्तेमाल कर सकती है।
दरअसल, साल 2024 में थरूर ने एक मलयालम पॉडकास्ट में कहा था, अगर कांग्रेस उनकी सेवाओं का उपयोग नहीं करना चाहती तो, उनके पास अन्य कई विकल्प है। जहां इस तरह के बयानों के बाद कयास लगे कि वह बीजेपी के साथ जा सकते हैं या कोई संवैधानिक पद स्वीकार कर सकते हैं। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार में पहुंच रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने ट्वीट करके लिखा ने ट्वीट करके लिखा मंत्रियों और शशि थरूर में से कोई भी धनखड़ का स्थान ले सकता है। जिसके बाद तो मानों हजारों लोगों ने थरूर के पक्ष में लिखना शुरू कर दिया, कई लोगों ने लिखा कि वे देश के लिए सर्वोत्तम उपराष्ट्रपति साबित हो सकते है।
क्या शशि थरूर इस पद को स्वीकार करेंगे?
हालांकि, जब-जब शशि थरूर से ये पूछा जाता है कि, क्या वे बीजेपी में जा रहे हैं तो उनका हर बार यही जवाब होता हैकि, कांग्रेस के साथ बने रहेंगे और बीजेपी में शामिल होने की उनकी कोई मंशा नहीं। साल 2024 में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह बीजेपी में शामिल होंगे, तो उन्होंने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया था। और अपनी पार्टी के समर्थन में राष्ट्रीय हित और कांग्रेस की विचारधारा है। अब वहीं ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिस तरह कांग्रेस की आलोचना करते हुए कई लेख लिखे गए है। उससे तो यही लगता है कि अब उनके दिन कांग्रेस में पूरे हो चुके हैं। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उनके खिलाफ लगातार जहर उगल रहे हैं। हालांकि, यदि बीजेपी उन्हें उपराष्ट्रपति पद की पेशकश करती है तो, थरूर जरूर इस पर विचार कर सकते हैं।
लेकिन, थरूर को नजदीक से जानने वाले लोगों का मानना है कि, उनकी इच्छा केरल में मुख्यमंत्री कैंडिडेट बनना है। लेकिन, कांग्रेस में रहते हुए अब यह संभव नहीं है। दूसरी तरफ अगर बीजेपी उन्हें केरल में सीएम कैंडिडेट बनाती है तो भी उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है। केरल में बीजेपी नाम अगर उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रस्तावित किया जाता है तो वो उस पर अपनी हामी भर दें.पर सवाल उठता है कि क्या बीजेपी एक बार फिर किसी बाहरी को संवैधानिक पद देकर अपना मजाक बनवाएंगी।
क्या थरूर को मोदी सरकार अपना प्रत्याशी बनाएगी?
बीजेपी को उच्च वर्ग शहरी क्षेत्र का मध्यवर्ग बहुत पसंद करता है, बीजेपी के पक्ष में पूरे देश में थरूर हवा बना सकते हैं। इसके साथ ही बीजेपी के मिशन साउथ को भी थरूर के नाम से पुश मिलेगा। थरूर अपनी स्वतंत्र सोच और बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। उपराष्ट्रपति के रूप में, वह बीजेपी की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं चल सकते हैं। ऐसे में बीजेपी की अपेक्षाओं के अनुरूप शंका ही बताई जा रही है।
उपराष्ट्रपति के पद के रुप में थरूर को राज्यसभा के सभापति के रूप में निष्पक्षता दिखानी होगी। लेकिन, मोदी सरकार कई मसलों पर वो खुलकर बीजेपी सरकार का सपोर्ट करें। कांग्रेस पृष्ठभूमि के चलते थरूर असमंजस में रह सकते है। रहेंगे। जगदीप धनखड़ की विदाई के पीछे भी कुछ ऐसा ही कारण रहा जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग के मुद्दे पर वो सरकार की मंशा को समझने में असफल रहे।





