नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के खिलाफ देश में विरोध की आवाजें लगातार तेज हो रही हैं। अब तमिल सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पार्टी के अध्यक्ष थलपति विजय भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गए हैं। विजय ने इस अधिनियम की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
16 अप्रैल को हो सकती है सुनवाई
विजय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 16 अप्रैल को सुनवाई हो सकती है। इस दिन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाली पीठ वक्फ एक्ट से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। इस पीठ में जस्टिस संजय कुमार और के वी विश्वनाथन भी शामिल होंगे।
मणिपुर से भी उठी विरोध की आवाज
वक्फ एक्ट को लेकर सिर्फ दक्षिण भारत ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से भी विरोध सामने आया है। वहां के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह ने कहा कि यह कानून संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ है। मणिपुर कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की बात कही है।
हैदराबाद में बड़ी रैली का ऐलान
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 19 अप्रैल को हैदराबाद के दारुस्सलाम में एक विरोध जनसभा का ऐलान किया है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि नया वक्फ कानून मुस्लिम संस्थाओं के अधिकार छीनने की कोशिश है, जिसे किसी कीमत पर मंजूर नहीं किया जाएगा।
केंद्र ने कोर्ट में डाली कैविएट याचिका
इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार भी सतर्क हो गई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि अदालत कोई भी फैसला देने से पहले सरकार का पक्ष जरूर सुने। सरकार का कहना है कि ये मामला धार्मिक संपत्तियों और करोड़ों लोगों से जुड़ा है, इसलिए इस पर गंभीर विचार जरूरी है।
क्या है वक्फ संशोधन अधिनियम 2025?
नया कानून 8 अप्रैल 2025 से लागू हो चुका है। इसका नाम अब बदलकर ‘उम्मीद’ अधिनियम यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट रखा गया है। वक्फ संपत्तियां सिर्फ मुस्लिम समुदाय को समर्पित नहीं की जा सकेंगी डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम की शुरुआत की गई है महिलाओं को पारिवारिक वक्फ में अधिकार देने की बात कही गई है लेकिन आलोचकों का मानना है कि इस कानून से अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक और सामाजिक अधिकारों पर असर पड़ेगा।





