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अबू आजमी ने हिंदुओं को लेकर दिए अपने बयान पर मांगी माफी, कहा – ‘मेरी मंशा गलत नहीं थी’

पंढरपुर वारी पालकी को लेकर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी द्वारा दिए गए बयान से विवाद खड़ा हो गया। आलोचनाओं के बाद अबू आजमी ने माफी मांगते हुए स्पष्टीकरण दिया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी ने पंढरपुर वारी पालकी यात्रा पर की गई अपनी टिप्पणी को लेकर माफी मांगी है। उनके बयान को लेकर राज्य की सियासत में हलचल मच गई है। भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने आजमी की बातों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश बताते हुए जमकर आलोचना की। बढ़ते विवाद के बीच अबू आजमी ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा, “अगर मेरे बयान से किसी को दुख पहुंचा हो तो मैं माफी मांगता हूं और अपने बयान को पूरी तरह से वापस लेता हूं। मेरी मंशा कभी भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी।”

“महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का करता हूं सम्मान” -अबू आजमी


सपा नेता अबू आजमी ने कहा, “मैं एक प्रतिबद्ध समाजवादी हूं और मेरा हमेशा यह प्रयास रहा है कि सभी धर्मों, संस्कृतियों, सूफी संतों और उनकी परंपराओं को पूरा सम्मान दूं। मैं पंढरपुर वारी की परंपरा निभा रहे सभी वारकरी साथियों को दिल से शुभकामनाएं देता हूं और उनके प्रति अपनी गहरी श्रद्धा प्रकट करता हूं। यह परंपरा महाराष्ट्र की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर की एक शानदार मिसाल है, जिसे मैं निजी तौर पर अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखता हूं।”

“मैंने केवल मुस्लिम समाज के साथ हो रहे भेदभाव की ओर ध्यान दिलाया था”


समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “मेरे वक्तव्य का उद्देश्य केवल मुस्लिम समुदाय के साथ हो रहे भेदभाव और उनके संवैधानिक अधिकारों की ओर ध्यान आकर्षित करना था। मैंने पंढरपुर वारी पालखी का उल्लेख इसी संदर्भ में किया था। मेरा इरादा किसी भी धर्म या परंपरा की तुलना करना नहीं था, और न ही मेरी मांग किसी भी दृष्टिकोण से अनुचित थी।”

अबू आजमी ने पीएम मोदी का किया जिक्र


सपा विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे का हवाला देते हुए कहा, “मेरी मंशा केवल इतनी थी कि सरकार का ध्यान इस ओर जाए कि उसके कुछ निर्णय या व्यवहार अल्पसंख्यक समुदाय के भीतर यह धारणा न बनने दें कि उनके लिए कोई अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। जब हमारे देश के प्रधानमंत्री स्वयं ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की बात करते हैं, तो नीतियों में भी उसी भावना का प्रतिबिंब दिखना चाहिए।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आजमी ने कहा, “हम समाज के उपेक्षित तबकों के अधिकार, सम्मान और समानता की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि हमारी कोशिशों से देश की एकता, अखंडता और सौहार्द पर कभी कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।”

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