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एनपीसीआईएल का 50 प्रतिशत उत्पादन मेंटिनेंस के लिए बंद किया गया

चेन्नई, 23 जून (आईएएनएस)। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) से संबंधित कुल 1,660 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर ईंधन भरने और रखरखाव के लिए बंद कर दी गई है। भारत की परमाणु ऊर्जा कंपनी एनपीसीआईएल की तमिलनाडु (2,440 मेगावाट) और कर्नाटक (880 मेगावाट) में कुल 3,320 मेगावाट क्षमता है। जो इकाइयाँ बंद हैं, वे हैं, कुडनकुलम इकाई 1-1,000 मेगावाट, मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन (एमएपीएस) की 2 इकाइयां – 440 मेगावाट, कैगा एटॉमिक पावर स्टेशन यूनिट 4-220 मेगावाट। मंगलवार को कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा स्टेशन (केएनपीएस) में स्थित 1,000 मेगावाट उत्पादन क्षमता को ईंधन भरने और वार्षिक रखरखाव के लिए बंद कर दिया गया, जबकि कैगा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र को रिएक्टर सुरक्षा संचालन के लिए रोक दिया गया था। नाम न छापने की शर्त पर एनपीसीआईएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि केएनपीएस में यूनिट 1 को ईंधन भरने और रखरखाव के उद्देश्य से बंद कर दिया गया था। अधिकारी ने कहा, आम तौर पर इस आकार के परमाणु रिएक्टर को 270-300 दिनों के संचालन के बाद फिर से भरना होता है। 163 ईंधन बंडल में से एक तिहाई को बदल दिया जाएगा। रिएक्टर में ईंधन भरने के साथ साथ पावर आइलैंड में टर्बाइन और अन्य मशीनों में भी बदलाव किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि यूनिट 2 में ईंधन भरने का काम इस अप्रैल में किया गया था और यह अच्छी तरह से काम कर रहा है। मंगलवार को केएनपीएस में यूनिट 2 ने 932 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया, जबकि कैगा में तीन इकाइयों का संचालन चल रहा है और 626 मेगावाट का उत्पादन हुआ है। एमएपीएस में 220 मेगावाट की एक इकाई तीन साल से अधिक समय से परिचालन में नहीं है, दूसरी इकाई को इस अप्रैल में रखरखाव के लिए बंद कर दिया गया था। एनपीसीआईएल कुडनकुलम में चार और 1,000 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण यूनिट 3 और 6 कर रहा है। यूनिट 3 और 4 का निर्माण कार्य प्रगति पर है जबकि यूनिट 5 और 6 के लिए निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। एक अधिकारी के अनुसार, कोविड 19 महामारी के कारण 3 और 4 इकाइयों का निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था, पर अब काम प्रगति पर है। –आईएएनएस एमएसबी/आरजेएस

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