Year Ender 2024: सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े फैसले, जो देश की न्याय व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होंगे

आज इस खबर के माध्यम से हम सुप्रीम कोर्ट के पांच ऐसे बड़े फैसलों पर चर्चा करेंगे जो देश की न्याय व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होंगे।

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Supreme Court
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐसे फैसले सुनाए हैं, जो देश के लिए काफी अहम हैं। यह बात तो साफ है कि कोर्ट के फैसले सभी के लिए खुशी लेकर नहीं आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में कई ऐसे फैसले सुनाएं हैं, जो देश की बड़ी आबादी के लिए काफी मायने रखते हैं। लेकिन हम इस खबर के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के सिर्फ 5 चुनिंदा फैसलों पर चर्चा करेंगे।

इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला काफी चर्चा में रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 को अपने ऐतिहासिक फैसले में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसको असंवैधानिक और स्पष्ट रूप से मनमाना बताया था। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय बेंच ने इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक फंडिंग के स्रोत का पूरी तरह से खुलासा न करने के कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2024 में लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लोकसभा चुनाव 2024 नजदीक हैं और इस तरह की याचिकाओं से देश में अराजकता और अनिश्चितता पैदा होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि चुनाव आयोग ‘कार्यपालिका के अधीन नहीं हैं, इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की शर्तें, अधिनियम,2023 के संचालन पर कोई अंतरिम रोक लगाने से भी साफ मना कर दिया था।

अनुच्छेद 370 की बहाली न करने को लेकर लिया गया फैसला

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करके पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा हटाने के मोदी सरकार के 5 अगस्त 2019 के फैसले को बरकरार रखने के अपने दिसंबर 2023 के फैसले की समीक्षा करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय बेंच ने कहा था कि समीक्षा याचिकाओं को देखने से रिकॉर्ड में कोई त्रुटि नहीं पाई गई।

अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण का फैसला

देश के सर्वोच्च न्यायालय की 7 सदस्यीय बेंच ने 6-1 से जुलाई 2024 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि अनुसूचित जातियों (SC) में भी ज्यादा पिछड़ों के लिए अलग से कोटा बनाने के लिए अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण बिल्कुल ठीक है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब यह है कि देश के हर राज्य में दलितों में से भी ज्यादा पिछड़ों की पहचान करके उन्हें मिलने वाले आरक्षण में से भी अलग से कोटे का प्रावधान किया जा सकता है। जिससे अति पिछड़ो को लाभ मिल सके।  

बुलडोजर न्याय वाली व्यवस्था पर पूरी तरह रोक का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को अपने बड़े फैसले में बुलडोजर न्याय वाली व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरोपियों और यहां तक कि दोषियों के खिलाफ भी बुलोडजर कार्रवाई असंवैधानिक और सरासर कानून के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जहां तक अवैध निर्माण तोड़ने का सवाल है, उसके लिए हमने गाइडलाइंस तय कर दिए हैं, जिसके तहत 15 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य होगा। अगर हमारी गाइडलाइंस को तोड़कर कार्रवाई की गई तो संबंधित अधिकारियों से हर्जाना वसूला जाएगा।