नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। Bhopal Gas Tragedy के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 377 टन कचरा निकाला गया है। इस कचरे को पीथमपुर ट्रांसफर कर दिया गया है। इस कचरे से जहरीला वेस्ट निकाला जाएगा। भोपाल से 12 सीलबंद कंटेनरों में कूड़े को भेजा गया है। इस ट्रांसफर में कोई परेशानी न आए ये सुनिश्चित करने के लिए एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।
भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया में करीब 100 लोग शामिल थे, इन लोगों ने यूनियन कार्बाइड से सारे कचरे को पैक किया और ट्रकों में लादा। उन्होंने बताया कि इस काम में लगे लोगों को हर 30 मिनट के काम के बाद हेल्थ चेकअप किया गया और 30 मिनट का आराम दिया गया।
भोपाल में 1984 को हुई थी भारी गैस त्रासदी
साल 1984 में 2 और 3 दिसंबर की दरमियानी रात को मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हो गया था। इस जहरीली गैस की वजह से भोपाल में 5479 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग गंभीर रूप से बीमार हुए थे। ये घटना दुनियाभर की सबसे बड़ी औद्योगिक घटनाओं में से एक है।
हाईकोर्ट ने दिया था 4 हफ्ते का समय
भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने को खाली नहीं करने के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चार हफ्ते का समय दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यूनियन कार्बाइड के वेस्ट मैनेजमेंट में ये लापरवाही एक और ट्रैजेडी का कारण बन सकती है।
इस तरीके से किया जाएगा वेस्ट मैनेजमेंट
पीथमपुर में पहुंचाए गए वेस्ट के कुछ हिस्सों को एक-एक करके जलाया जाएगा। जलने के बाद जो अवशेष बचेगा उसे जांच के लिए भेजा जाएगा।




