नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ‘मियां’ वाली टिप्पणी को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को एक्स पर पोस्ट कर कड़ा विरोध जताते हुए आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री संविधान की शपथ लेकर उसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं और समाज में नफरत के बीज बो रहे हैं। कांग्रेस ने हिमंता बिस्वा सरमा का एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें वह कथित तौर पर कहते नजर आ रहे हैं। कोई मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो… खूब परेशान करो। इस बयान को लेकर कांग्रेस ने इसे विभाजनकारी और असंवैधानिक करार देते हुए सीएम पर निशाना साधा है।
बीजेपी-RSS की नफरती सोच- कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने इस बयान को लेकर भाजपा और आरएसएस पर सीधा हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि यह “घटिया बयान” असम के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाडले हिमंता बिस्वा सरमा का है, जो संविधान की शपथ लेकर उसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं और देश में नफरत के बीज बो रहे हैं। कांग्रेस के मुताबिक यह बयान न सिर्फ बेहूदा है, बल्कि बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान और भारत की गंगा-जमुनी तहजीब पर सीधा हमला है, जिसने हर भारतीय को समानता का अधिकार दिया। कांग्रेस ने मांग की कि हिमंता बिस्वा सरमा की इस शर्मनाक टिप्पणी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।
असम के सीएम की मुस्लिम समुदाय पर विवादित टिप्पणी
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (27 जनवरी 2026) को कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से किसी भी असमिया नागरिक को कोई परेशानी नहीं हो रही है, बल्कि केवल ‘मिया’ यानी बांग्ला भाषी मुस्लिम समुदाय को ही इस प्रक्रिया से दिक्कत आ रही है। डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ‘मियां’ समुदाय के लोगों को राज्य में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
बांग्लादेश में वोट देना चाहिए’: हिमंता बिस्वा सरमा का विवादित बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर ‘मियां’ समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, “हां, हम मियां समुदाय के वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें हमारे देश में नहीं, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। सरमा ने यह भी दावा किया कि सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है जिससे वे असम में मतदान न कर सकें। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, अगर मियां समुदाय को इस प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए? मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।




