नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को सर्च कर एक-एक को बाहर निकाला जा रहा है। इनका साथ या समर्थन देने वालों की भी पहचान कर उसे जेल में डाला जा रहा है। इस बीच, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में 3 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में एक पुलिस कांस्टेबल, एक शिक्षक और एक मेडिकल कॉलेज का जूनियर असिस्टेंट शामिल हैं। जिन पर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के लिए काम करने का आरोप लगा है। इन पर बड़ा एक्शन लेते हुए इन्हें सेवा से हटा दिया है।
बर्खास्त आतंकीयों पर लगे गंभीर आरोप
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की पहचान मलिक इश्फाक नसीर (पुलिस कांस्टेबल), एजाज अहमद (शिक्षक), और वसीम अहमद खान (मेडिकल कॉलेज में जूनियर असिस्टेंट) के रूप में की गई है। इन तीनों पर आरोप है कि ये आतंकी संगठनों को सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमलों में मदद करते थे।
वसीम अहमद खान पर विशेष रूप से गंभीर आरोप लगा हैं। जिसमें 2018 में वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी और उनके दो पुलिस सुरक्षा गार्डों की हत्या में सहायता करने का भी आरोप लगा है। जांच में पाया गया कि खान ने आतंकियों को रसद सहायता दी और फरारी में मदद की।
उपराज्यपाल की सख्त नीति
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2020 में कार्यभार संभालने के बाद से आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लगे हैं। अब तक 75 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को आतंकी गतिविधियों में रहने के कारण नौकरी से बर्खास्त किया कर दिया है। उन्होने सुरक्षा बलों को आतंकी संगठनों और उनको मदद करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की छूट दी है।
जांच और कार्रवाई का आधार
खुफिया एजेंसियों की गहन जांच के बाद इन कर्मचारियों के खिलाफ सबूत जुटाए गए।जिसमें उनके आतंकी संगठनों से सीधे संपर्क और हिंसक गतिविधियों में साथ होने के प्रमाण शामिल हैं। तीनों कर्मचारी वर्तमान में जेल में हैं और अलग-अलग आतंकी मामलों में सजा काट रहे हैं। इस कार्रवाई को जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है।




